उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस नोट के मुताबिक अपराधी अपनी पहचान छिपाकर या पड़ोस, पारिवारिक या सामाजिक संबंधों का फायदा उठाकर बच्चों का यौन शोषण करते हैं। कुछ मामलों में अपराधी बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लेते हैं और फिर उन्हें ब्लैकमेल कर गलत काम करने पर मजबूर करते हैं। कई बार डिजिटल माध्यमों से ऐसी चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन एंड एब्यूज मैटेरियल (CSEAM) सामग्री तैयार कर उसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, स्नैपचैट और जीमेल जैसे ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेचा और प्रसारित किया जाता है। यह सामग्री बच्चों के अधिकारों और उनकी गरिमा का गंभीर उल्लंघन है और इसे वैश्विक स्तर पर सबसे गंभीर साइबर अपराधों में से एक माना जाता है। CSEAM का प्रसार बच्चों को लंबे समय तक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक क्षति पहुंचा सकता है।