न्यूयॉर्क के लिंकन सेंटर के नीचे एक तहख़ाने में, बीते ज़माने की आवाज़ों, चेहरों और यादों को सहेजने की जद्दोजहद जारी है. एक सदी से भी पुरानी इन रिकॉर्डिंग में अनगिनत ज़िन्दगियों की कहानियाँ क़ैद हैं. लेकिन वक़्त के साथ ये रिकॉर्डिंग ख़राब हो रही हैं और इन्हें चलाने वाली मशीनें भी लुप्त होती जा रही हैं.
न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी में मीडिया संरक्षण इंजीनियर रॉनी डोस्टली मुस्कुराते हुए बताते हैं, “मैं अपने बच्चों से कहता हूँ कि मैं एक टाइम मशीन में काम करता हूँ.”
उनका काम भी कुछ ऐसा ही है. पुरानी फ़िल्मों और रिकॉर्डिंग के ज़रिए वह इतिहास के भूले-बिसरे पलों को फिर से सामने लाते हैं.
रॉनी कहते हैं, “मैं अतीत में लौटता हूँ, वहाँ से पुरानी यादों और धरोहरों को समेटता हूँ और उन्हें वर्तमान में लोगों के लिए उपलब्ध कराता हूँ.”
इस काम में उनके सहकर्मी भी जुटे हैं. वे एक सदी से भी पुरानी आवाज़ों और फ़िल्मों को सहेजने की कोशिश कर रहे हैं. टेप, डिस्क और सिलिंडरों में दर्ज ये रिकॉर्डिंग वक़्त के साथ ख़राब होती जा रही हैं और इन्हें चलाने वाली मशीनें भी धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं.
रॉनी डोस्टली के लिए यह काम सिर्फ़ पुरानी रिकॉर्डिंग सहेजना नहीं है. इन फ़िल्मों के ज़रिए उन्होंने कई लोगों की ज़िन्दगियों को क़रीब से देखा है.
मशहूर अमेरिकी गायक, अभिनेता, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और लम्बे समय तक यूनीसेफ़ के सदभावना दूत रहे हैरी बेलाफ़ोन्टे ने दशकों तक अपने परिवार के पलों को कैमरे में क़ैद किया. इनमें सेंट्रल पार्क में बेटे को साइकिल चलाना सिखाने से लेकर विदेश यात्राओं तक के दृश्य हैं.
रॉनी कहते हैं, “इसके ज़रिए मैंने उनके बच्चों को बड़े होते देखा है.”
अफ़्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मैल्कम एक्स की यात्राओं की फ़िल्मों ने रॉनी को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया. इनमें मक्का की यात्रा के दृश्य भी थे. रॉनी कहते हैं, “मुझे लगा कि इन दुर्लभ दृश्यों को दुनिया के सामने लाने की ज़िम्मेदारी मेरी है.”
उन्हें उम्मीद है कि ऐसी ऐतिहासिक फ़िल्मों से युवा पीढ़ी “अपने जन्म से पहले हुई घटनाओं का महत्व समझ सकेगी.”
बग़ल के कमरे में मीडिया संरक्षण समन्वयक केसी मैकनमारा एक फ़िल्म की रील जाँच रही हैं. छोटे आवर्धक लेंस से वह एक-एक फ़्रेम देखती हैं, ताकि टूट-फूट, जोड़ या सिकुड़न का पता चल सके.
फ़िल्म की शुरुआत में लगी सफ़ेद पट्टी पर “भरतनाट्यम” लिखा है, जो भारत के सबसे पुराने शास्त्रीय नृत्यों में से एक है.
केसी बताती हैं कि पुरानी फ़िल्में कभी “ज़ंग लगे टिन के डिब्बों में, कभी पुरानी रीलों पर, तो कभी प्लास्टिक की थैलियों में” पहुँचती हैं. अगर इन्हें सहेजा न जाए, तो इनमें दर्ज कई दुर्लभ दृश्य शायद कभी दुनिया के सामने नहीं आ पाएँगे.
यह प्रयोगशाला न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी (NYPL) के डिजिटल संग्रह विभाग का हिस्सा है. डिजिटल रूप में सहेजे जाने के बाद, लाइब्रेरी कार्ड रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह फ़िल्में और रिकॉर्डिंग देख-सुन सकेगा.
प्रयोगशाला के प्रबन्धक शाहेद दौलतशाही कहते हैं, “इन टेपों और इन्हें चलाने वाली मशीनों का निर्माण अब बन्द हो चुका है, लेकिन इनमें दर्ज इतिहास को बचाना ज़रूरी है.”
ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष 27 अक्टूबर को विश्व दृश्य-श्रव्य विरासत दिवस मनाता है.
ऑडियो कक्ष में जैफ़ विलेंस भूरे लिफ़ाफ़े से 16 इंच की एक पुरानी डिस्क निकालते हैं, जिस पर लिखा है, ‘एक यादगार वर्ष’.
संयुक्त राष्ट्र के रेडियो विभाग ने इसे 1 जनवरी 1949 को प्रसारण के लिए तैयार किया था. उस समय संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में स्थित लेक सक्सेस में था. इसकी प्रतियाँ दुनिया भर के रेडियो स्टेशनों और संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों को भेजी गई होंगी.
जैफ़ डिस्क को माइक्रोस्कोप लगी एक विशेष मशीन पर रखते हैं. डिस्क घूमती है और कमरे में अभिनेता फ़्रैडरिक मार्च और खेल कमेंटेटर टेड ह्यूज़िंग की आवाज़ें गूँज उठती हैं.
पास के कमरे में इंजीनियर मशहूर अफ़्रीकी-अमेरिकी डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माता विलियम ग्रीव्स के संग्रह को डिजिटल रूप दे रहे हैं.
उनकी 2001 की फ़िल्म ‘Ralph Bunche: An American Odyssey’ अमेरिकी राजनयिक राल्फ़ बंच की कहानी है. इसराइल और अरब देशों के बीच युद्धविराम समझौतों में मध्यस्थता के लिए उन्हें 1950 का नोबेल शान्ति पुरस्कार मिला था.
राल्फ़ बंच नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति थे. बाद में वह संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव भी बने.
लेकिन इस ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए वक़्त कम होता जा रहा है.
न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी की कई पुरानी फ़िल्में ‘विनेगर सिंड्रोम’ नामक रासायनिक प्रक्रिया से ख़राब हो रही हैं. इससे फ़िल्में कमज़ोर और टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं और उनमें सिरके जैसी गन्ध आने लगती है.
केसी मैकनमारा बताती हैं, “एक बार यह प्रक्रिया शुरू हो जाए, तो इसे रोका नहीं जा सकता. फ़िल्मों को ठंडे स्थान पर रखकर इसकी रफ़्तार धीमी की जा सकती है, लेकिन नुक़सान की भरपाई नहीं हो सकती.”
कई ऑडियो टेप भी मुड़ी-तुड़ी या आपस में चिपकी हुई हालत में पहुँचती हैं. इन्हें हाथों से बेहद सावधानी से ठीक करना पड़ता है.
मीडिया संरक्षण इंजीनियर विक्टोरिया फ़जार्डो कहती हैं, “ख़राब टेप की मरम्मत करना, उसे चलाना और उसमें दर्ज आवाज़ों को डिजिटल रूप में सहेजना, सर्जरी करने जैसा है.”
वह कहती हैं, “यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे ऐसी कई रिकॉर्डिंग सबसे पहले सुनने का मौक़ा मिलता है, जिन्हें रिकॉर्ड करने के बाद से किसी ने नहीं सुना.”
यहाँ तक कि कभी बेहद टिकाऊ मानी जाने वाली डिजिटल बीटाकैम कैसेटों की परतें भी उखड़ने लगी हैं. वीडियो प्रयोगशाला स्थापित करने वाले विशेषज्ञ फ़्रांसिस डोहर्टी को अब हर टेप के बाद मशीन साफ़ करनी पड़ती है.
वह कहते हैं, “हर साल यह काम मुश्किल होता जा रहा है. हर साल पुरानी रिकॉर्डिंग की हालत बिगड़ रही है.”
फ़्रांसिस डोहर्टी कहते हैं, “पुरानी मशीनें अब दुर्लभ होती जा रही हैं और उनकी मरम्मत करने वाले पुराने विशेषज्ञ तो और भी कम बचे हैं.”
रिकॉर्डिंग बचाने का काम कितनी जल्दी हो जाना चाहिए? इस सवाल पर वह बिना हिचकिचाए कहते हैं, “यह काम तो 20 साल पहले ही हो जाना चाहिए था.”
विश्वविद्यालय युवा विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, लेकिन पुरानी मशीनें कम होने से उन्हें काम सीखने के मौक़े भी घट रहे हैं.
शाहेद दौलतशाही कहते हैं, “इन मशीनों की मरम्मत और देखभाल करने वाले लोग नहीं होंगे, तो हम रिकॉर्डिंग भी नहीं बचा पाएँगे. और अब ऐसे विशेषज्ञ गिने-चुने ही बचे हैं.”
कुछ मशीनें विशेष रूप से हाथ से बनाई जा रही हैं. संयुक्त राष्ट्र की पुरानी डिस्क चलाने वाली ऐसी ही एक मशीन कैलिफ़ोर्निया के इंजीनियर निक बर्ग ने बनाई है. वह इसे अपना “शौक़” बताते हैं. न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के पास इस तरह की दुनिया की शुरुआती मशीनों में से एक है.
मशीन अभी पूरी तरह तैयार नहीं है. फ़िलहाल, इसमें लगे माइक्रोस्कोप से डिस्क पर खरोंचों की जाँच की जा सकती है. भविष्य में यह रोशनी की मदद से डिस्क को छुए बिना उसमें दर्ज आवाज़ें पढ़ सकेगी.
निक बर्ग की एक अन्य मशीन लेज़र की मदद से पुराने, मुड़े-तुड़े मोम के सिलिंडरों को बेहद सटीक ढंग से सही स्थिति में लाती है. यह टूटे सिलिंडरों में दर्ज आवाज़ें भी बिना छुए पढ़ सकती है.
इसी मशीन की मदद से लाइब्रेरी ने ‘मैपलसन सिलिंडर्स’ की ऐतिहासिक रिकॉर्डिंग दोबारा डिजिटल रूप में सहेजी हैं. ये रिकॉर्डिंग 1900 के दशक की शुरुआत में मेट्रोपॉलिटन ओपेरा में की गई थीं. इनमें “ऐसे गायकों की अनूठी प्रस्तुतियाँ दर्ज हैं, जिनकी आवाज़ कहीं और रिकॉर्ड नहीं हुई.”
जैफ़ विलेंस के अनुसार, विडम्बना यह है कि पुरानी रिकॉर्डिंग सुनने की तकनीक बेहतर हो रही है, लेकिन रिकॉर्डिंग ख़ुद लगातार ख़राब हो रही हैं.
हर गुज़रते साल के साथ इस अनमोल विरासत को हमेशा के लिए खो देने का ख़तरा बढ़ रहा है.