तेज़ी से गर्म होती दुनिया में ऐल नीन्यो और मज़बूत हो रहा है, जिससे कई प्रमुख खाद्य उत्पादक क्षेत्रों में सूखे, बाढ़ और फ़सलों के नुक़सान का ख़तरा बढ़ रहा है. मगर इसके सम्भावित असर का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है. यूएन विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीने देशों के लिए अगली फ़सल और खाद्य सुरक्षा की रक्षा करने के साथ-साथ, अधिक अनिश्चित जलवायु के लिए बेहतर तैयारी का भी अहम मौक़ा हैं.
मंगलवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यूएन महासभा की 81वीं जनरल डिबेट शुरू हुई. ठंडी और बारिश भरी सुबह के बावजूद, भीतर बैठकों और कार्यक्रमों की रफ़्तार तेज़ रही.
जलवायु परिवर्तन दिन भर की चर्चाओं में एक अहम मुद्दा रहा. सूखा, बाढ़, अत्यधिक गर्मी, समुद्र का बढ़ता स्तर और भोजन व पानी पर बढ़ता दबाव – ये सभी ऐसे जोखिम हैं, जिन्हें ऐल नीन्यो और गम्भीर बना सकता है.
उष्णकटिबंधीय प्रशान्त महासागर में विकसित होने वाला ऐल नीन्यो एक बार फिर मज़बूत हो रहा है. इससे वर्षा और तापमान के पैटर्न बदल रहे हैं, जिसका असर कई क्षेत्रों में फ़सलों और खाद्य आपूर्ति पर पड़ सकता है.
यूएन महासभा के वार्षिक उच्चस्तरीय सप्ताह से इतर, संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के सहायक महानिदेशक और जलवायु मामलों के प्रमुख कावेह ज़ाहेदी ने यूएन न्यूज़ से कहा कि इस बार ऐल नीन्यो पहले से कहीं अधिक गर्म दुनिया में विकसित हो रहा है.
उन्होंने कहा, “दुनिया अब पहले से अधिक गर्म है और ऐसे में ऐल नीन्यो के प्रभाव और भी गम्भीर हो सकते हैं.”
किसानों के लिए इसका सीधा असर फ़सल और आजीविका पर पड़ सकता है – फ़सल अच्छी होगी या बर्बाद, पशुधन के लिए पर्याप्त चारा मिलेगा या नहीं, और एक सामान्य झटका भी खाद्य सुरक्षा संकट में बदल सकता है.
लेकिन कई अन्य आपदाओं के विपरीत, ऐल नीन्यो अपने आने के संकेत पहले ही दे देता है. वैज्ञानिक प्रशान्त महासागर में इसके विकास पर नज़र रख सकते हैं, जिससे सरकारों को तैयारी के लिए अहम समय मिल जाता है – बशर्ते उनके पास कार्रवाई के लिए ज़रूरी साधन और इच्छाशक्ति हो.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) का कहना है कि ऐल नीन्यो तेज़ी से मज़बूत हो रहा है और जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में इसके असर पहले ही दिखने लगे हैं.
जिनीवा में मंगलवार को एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारा अनुमान है कि यह ऐल नीन्यो बेहद शक्तिशाली होगा. यह हमारी सबसे ऊँची श्रेणी है.”
इसके वर्ष के अन्त तक चरम पर पहुँचने की सम्भावना है, लेकिन WMO ने आगाह किया है कि चरम बिन्दु इसका अन्त नहीं होगा. इसके प्रभाव उसके बाद भी जारी रह सकते हैं.
WMO महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा, “हमारे पास पूर्वानुमान है और विज्ञान भी.” यानि सरकारों के पास जोखिम सामने आने से पहले तैयारी के लिए पहले से कहीं अधिक जानकारी उपलब्ध है.
WMO प्रशान्त महासागर में बड़े पैमाने पर हो रहे बदलावों पर नज़र रखता है, जबकि FAO चार दशकों से अधिक के आँकड़ों के आधार पर यह समझता है कि अतीत में शक्तिशाली ऐल नीन्यो ने कृषि को कैसे प्रभावित किया.
इन आँकड़ों को मौजूदा हालात, मौसमी पूर्वानुमानों और खाद्य असुरक्षा से जुड़ी जानकारी के साथ जोड़कर FAO जोखिम वाले इलाक़ों की अधिक सटीक पहचान कर सकता है. कुछ मामलों में लगभग एक वर्ग किलोमीटर के स्तर तक संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान सम्भव है, जिससे सरकारों को यह तय करने में मदद मिलती है कि कहाँ और कब सबसे पहले कार्रवाई करनी है.
कावेह ज़ाहेदी ने कहा, “इन जानकारियों को मिलाकर काफ़ी हद तक पता लगाया जा सकता है कि ऐल नीन्यो का सबसे अधिक असर कहाँ पड़ेगा और इससे खाद्य उत्पादन व खाद्य सुरक्षा किस तरह प्रभावित होगी.”
FAO के अनुसार, दक्षिणी अफ़्रीका और साहेल, मध्य अमेरिका के शुष्क गलियारे तथा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में कृषि सूखे का ख़तरा अधिक है. वहीं अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ बड़ा जोखिम बन सकती है, जबकि असामान्य रूप से गर्म समुद्री जल से मत्स्य पालन और तटीय आजीविकाएँ प्रभावित हो सकती हैं.
इसके गम्भीर असर पहले भी देखे जा चुके हैं. वर्ष 2023-2024 के शक्तिशाली ऐल नीन्यो के दौरान मोरक्को में अत्यधिक गर्मी और सूखे से अनाज की पैदावार 43 प्रतिशत घट गई थी.
दक्षिणी अफ़्रीका में एक सदी से भी अधिक समय का सबसे भीषण सूखा पड़ा, जिससे 6.1 करोड़ लोगों को सहायता की ज़रूरत पड़ी और 80 लाख से अधिक लोग खाद्य असुरक्षा की चपेट में आए. ख़राब फ़सलों के कारण दुनिया के कुछ हिस्सों में प्रमुख खाद्य पदार्थों की क़ीमतें भी बढ़ीं.
कावेह ज़ाहेदी ने कहा, “पिछली बार पर्याप्त तैयारी नहीं होने के नतीजे हमारे सामने हैं.”
तैयारी के उपाय व्यावहारिक हैं – सूखा-रोधी बीज, बेहतर जल भंडारण, स्वस्थ मिट्टी, पशुधन की सुरक्षा और किसानों तक समय रहते चेतावनी पहुँचाना, ताकि वे बुवाई का समय या फ़सल बदल सकें.
कावेह ज़ाहेदी ने कहा, “हम बहुत कुछ कर सकते हैं. हमारे पास कुछ समय है, लेकिन तेज़ी से कार्रवाई करनी होगी क्योंकि यह अवसर लगातार कम हो रहा है.”
उन्होंने कहा कि अगली फ़सल को सुरक्षित रखने के लिए ये उपाय फ़रवरी-मार्च तक लागू करने होंगे.
ऐल नीन्यो से निपटने के लिए किए गए यही निवेश, अधिक गर्म और अनिश्चित जलवायु के अनुकूल ढलने में भी मदद करते हैं. बेहतर जल प्रबन्धन,समय पर चेतावनी, जलवायु-सहनसक्षम फ़सलें व पशुधन, स्वस्थ मिट्टी और मज़बूत पारिस्थितिकी तंत्र – सभी इसके लिए अहम हैं.
FAO के अनुसार, ऐल नीन्यो की तैयारी, कम समय में जलवायु अनुकूलन की ही एक परीक्षा है.
मगर कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए वित्तीय सहायता लगातार घट रही है.
FAO के आगामी विश्लेषण के अनुसार, इन प्रणालियों के लिए जलवायु सम्बन्धी विकास वित्त 2024 में 10 प्रतिशत घटकर 26.9 अरब डॉलर रह गया. फ़सल, पशुधन, वानिकी और मत्स्य क्षेत्रों को कुल जलवायु विकास वित्त का केवल लगभग पाँच प्रतिशत मिला.
अफ़्रीका को कुल मिलाकर जलवायु सम्बन्धी विकास वित्त अधिक मिला, लेकिन उसमें से कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए मिलने वाली राशि 20 प्रतिशत कम हो गई.
कावेह ज़ाहेदी ने कहा, “उत्पादक क्षेत्रों और उनकी सहनसक्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त निवेश नहीं हो रहा है. विशेषकर ऐल नीन्यो वाले वर्ष में खाद्य सुरक्षा बचानी है, तो यह निवेश बढ़ाना होगा.”
यह मुद्दा बुधवार को यूएन मुख्यालय में होने वाले जलवायु शिखर सम्मेलन में भी प्रमुखता से उठेगा, जहाँ जलवायु अनुकूलन और वित्त पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है.
ऐल नीन्यो ने इस चर्चा को और अहम बना दिया है. इसे रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके कई सम्भावित प्रभावों का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है. सबसे अधिक जोखिम वाले कुछ क्षेत्रों में सरकारों के पास तैयारी के लिए अभी भी कई महीने हैं.
कावेह ज़ाहेदी ने कहा, “ऐल नीन्यो के दौरान जलवायु अनुकूलन में निवेश करना एक स्पष्ट विकल्प है. हमारे पास अभी कार्रवाई का अवसर है.”
FAO के अनुसार, यह निवेश केवल कृषि को जलवायु झटकों से बचाने के लिए नहीं, बल्कि कृषि को समाधान का हिस्सा बनाने के लिए भी ज़रूरी है.
ज़ाहेदी ने कहा, “हम कृषि को केवल जलवायु प्रभावों से प्रभावित क्षेत्र के रूप में नहीं देखते, बल्कि यह भी दिखाना चाहते हैं कि उसके पास समाधान मौजूद हैं.”
उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त भूमि की बहाली, कृषि-वानिकी का विस्तार और पशुधन व जलीय कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने से जलवायु सहनसक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता और उत्सर्जन में कटौती में भी मदद मिल सकती है.
उन्होंने कहा, “जलवायु, खाद्य सुरक्षा और सम्भवतः जैव विविधता के लिए भी, कृषि-खाद्य प्रणालियों से जुड़े समाधानों से बेहतर निवेश शायद ही कोई हो.”