मध्य पूर्व में युद्ध और अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जबकि तेल की क़ीमतें भी ऊँची बनी हुई हैं. ऐसे में, अधिकतर देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को कोयला, तेल व गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता से होने वाले झटकों से बचाने, आयात पर किए जाने धन ख़र्च को नियंत्रित करने और जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नवीकरणीय यानि हरित ऊर्जा में निवेश बढ़ा रहे हैं.