संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि अवैध इसराइली बस्तियों के विस्तार और विलय की कार्रवाइयों से इसराइल-फ़लस्तीन दो-राष्ट्र समाधान की सम्भावना लगातार कमज़ोर पड़ रही है.
यूएन महासभा से इतर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि दो-राष्ट्र समाधान के लिए समर्थन बढ़ा है, लेकिन क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में मौजूदा हालात इस लक्ष्य को और मुश्किल बना रहे हैं.
कैनेडा, फ्रांस, सऊदी अरब और ब्रिटेन की मेज़बानी में हुई इस बैठक में उन्होंने ग़ाज़ा में युद्ध से हुई तबाही और पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों के बाशिन्दों द्वारा किए गए हमलों का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, “एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, भौगोलिक रूप से जुड़ा, व्यवहार्य और सम्प्रभु फ़लस्तीनी राष्ट्र बनाने के लिए ज़रूरी परिस्थितियाँ लगातार ख़त्म की जा रही हैं.”
The Road Ahead नामक इस बैठक में दो-राष्ट्र समाधान और ग़ाज़ा के लिए व्यापक शान्ति योजना पर चर्चा हुई.
यह बैठक सितम्बर 2025 में अपनाए गए न्यूयॉर्क घोषणापत्र पर आगे की कार्रवाई पर केन्द्रित थी, जिसमें विश्व नेताओं ने 2023 में इसराइल पर हमास के हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध को समाप्त करने का संकल्प लिया था. इस युद्ध में ग़ाज़ा में व्यापक तबाही हुई है और 70 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं.
यूएन सुरक्षा परिषद ने अक्टूबर 2025 के युद्धविराम समझौते और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की 20-सूत्री अन्तरिम योजना का भी समर्थन किया था, जिसके तहत उनकी अध्यक्षता में एक ‘शान्ति बोर्ड’ बनाया गया.
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए.”
उन्होंने कहा कि इसराइलियों और फ़लस्तीनियों के बीच टिकाऊ शान्ति का एकमात्र विश्वसनीय रास्ता दो-राष्ट्र समाधान है, जो 1967 से पहले की सीमाओं, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून, सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों और पूर्व समझौतों पर आधारित हो. व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी यह बेहद अहम है.
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के निष्कर्षों और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिमी तट में अवैध इसराइली बस्तियों की स्थापना, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का स्पष्ट उल्लंघन है.
इसके बावजूद, बस्तियों का विस्तार जारी है, नई चौकियाँ भी बढ़ रही हैं और फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ इसराइली बस्तियों के बाशिन्दों की हिंसा की घटनाओं में तेज़ वृद्धि हुई है. इनमें घरों को ध्वस्त करना, लोगों को बेदख़ल करना, ज़मीन पर क़ब्ज़ा करना और पवित्र स्थलों पर उल्लंघन शामिल हैं.
महासचिव ने कहा कि इन अवैध कार्रवाइयों से दबाव व भय का माहौल बन रहा है, फ़लस्तीनी परिवार विस्थापित हो रहे हैं और जातीय सफ़ाए की आशंकाएँ बढ़ रही हैं.
उन्होंने क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट के E1 क्षेत्र में इसराइली बस्ती योजना पर विशेष चिन्ता जताते हुए कहा कि यदि यह आगे बढ़ी तो “एक भौगोलिक रूप से जुड़े और व्यवहार्य फ़लस्तीनी राष्ट्र की सम्भावना लगभग ख़त्म हो सकती है.”
ग़ाज़ा का उल्लेख करते हुए महासचिव ने कहा कि बेहतर भविष्य के वादे तब तक बेमानी हैं, जब तक ज़मीनी हालात में ठोस सुधार नहीं होता. ग़ाज़ा की 23 लाख आबादी में से अधिकतर लोग अब भी ध्वस्त इमारतों के बीच तम्बुओं में रहने को मजबूर हैं.
एंतोनियो गुटेरेश ने ट्रम्प शान्ति योजना को पूरी तरह लागू किए जाने का आग्रह किया.
साथ ही, उन्होंने ये क़दम उठाए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया:
इस दिशा में कुछ यूएन सदस्य देशों द्वारा हाल में उठाए गए क़दमों का स्वागत करते हुए महासचिव ने कहा कि ग़ाज़ा और पश्चिमी तट को एक वैध फ़लस्तीनी सरकार के शासन में राजनैतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय रूप से एकजुट रहना होगा.
उन्होंने कहा कि अन्तिम लक्ष्य दो सम्प्रभु और लोकतांत्रिक राष्ट्रों – इसराइल एवं फ़लस्तीन की स्थापना है, जो सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर साथ-साथ रहें तथा दोनों की राजधानी येरूशेलम हो.
महासचिव ने कहा, “इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है, और समय निकलता जा रहा है.”
यूएन मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में हालात से जुड़े कुछ ताज़ा घटनाक्रम इस प्रकार हैं: