संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को ख़त्म करने के लिए एक अपील जारी करते हुए कहा है कि इस टकराव का वैश्विक व्यापार पर गहरा असर हुआ है.
यूएन प्रमुख ने पाकिस्तान की अपनी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत पर राजधानी इस्लामाबाद में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वह यहाँ से सभी पक्षों को एक स्पष्ट सन्देश देना चाहते हैं.
“हिंसक टकराव का अन्त कीजिए. कूटनीति की ओर लौटिए. अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप नौवहन अधिकारों व स्वतंत्रताओं को बहाल कीजिए.”
इस वर्ष, फ़रवरी में अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हवाई बमबारी की थी, जिसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों और मध्य पूर्व क्षेत्र में अन्य देशों पर ड्रोन व मिसाइल हमले किए. साथ ही, तेल, गैस, उर्वरक व अन्य सामान की आपूर्ति के लिए अहम जलमार्ग, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों की आवाजाही को ठप कर दिया था.
पिछले कई महीनों से इस जलक्षेत्र से होकर गुज़रने वाले सैकड़ों जहाज़ों व उनके चालक दल के सदस्यों को कठिनाई का सामना करना पड़ा है.
यह लड़ाई यमन के लाल सागर के तटीय इलाक़े तक फैल गई है, जहाँ ईरान-समर्थित हूथी लड़ाके सरकारी सुरक्षा बलों के साथ टकराव में हैं, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है. यह लड़ाई बाब अल-मन्दाब जलडमरूमध्य मार्ग पर नियंत्रण के लिए हो रही है.
यूएन महासचिव ने ईरान और अमेरिका के बीच सम्वाद के लिए परिस्थितियाँ तैयार करने में पाकिस्तान द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप 17 जून को इस्लामाबाद सहमति-पत्र, युद्धविराम का मार्ग और आगे बातचीत जारी रखने के लिए फ़्रेमवर्क तैयार हुआ.
उन्होंने आगाह किया कि इस क्षेत्र में तब तक शान्ति स्थापित नहीं हो सकती है, जब तक फ़लस्तीनी आबादी को पूर्ण रूप से स्व-निर्धारण का अधिकार नहीं मिल जाता है. यूएन प्रमुख ने सम्वाद व सहयोग की बुनियाद पर क्षेत्रीय शान्ति व समृद्धि की उम्मीद जताई.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में हिंसक टकराव और अस्थिरता से जूझ रहे लाखों शरणार्थियों को शरण दी है. महासचिव ने कहा कि इन शरणार्थियों की अपने देश में वापसी को स्वैच्छिक, सुरक्षित व गरिमामय बनाने के लिए यूएन, पाकिस्तान के साथ मिलकर प्रयास करेगा.
यूएन प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान, यूएन शान्तिरक्षा अभियानों में सबसे अधिक योगदान देने वाले देशों में है और उसके अब तक 180 शान्तिरक्षक शान्ति की सेवा में अपने प्राण गँवा चुके हैं.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि पाकिस्तान और डेनमार्क ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2823 में अग्रणी भूमिका निभाई, जिसमें यूएन शान्तिरक्षकों के विरुद्ध अपराधों की जवाबदेही व्यवस्था को मज़बूती देने पर बल दिया गया है. इस प्रस्ताव को 153 देशों ने प्रायोजित किया था.
उन्होंने कहा कि 2022 में विनाशकारी बाढ़ के बाद अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान यहाँ हुई तबाही को देखा. “पाकिस्तान जलवायु उथलपुथल के अग्रिम मोर्चे पर है, जबकि वैश्विक उत्सर्जनों में उसका योगदान मामूली है.”
उन्होंने अपने सन्देश में विकसित देशों से आग्रह किया कि उन्हें इस दशक के अन्त तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती लाने के प्रयासों की अगुवाई करनी होगी.