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संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि तालेबान शासन के पाँच साल बाद भी अफ़ग़ान लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने वाले सैनिकों, पुलिसकर्मियों और नैतिकता अधिकारियों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की जाती है. पारदर्शिता की यह कमी शासन व्यवस्था में लोगों का भरोसा कमज़ोर कर रही है.