संयुक्त राष्ट्र कमज़ोर होता जा रहा है और फ़लस्तीन से लेकर सूडान तक, जिन लोगों की उम्मीदें इस विश्व संगठन पर टिकी हुई हैं, उन्हें निराशा हाथ लग रही है. तुर्कीये के राष्ट्रपति रैचप तैयप ऐरदोआन ने यूएन महासभा के 81वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए कहा कि उनका देश, इस संगठन में विश्वास को फिर से बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को बनाए रखने के इरादे से संयुक्त राष्ट्र को 81 वर्ष पहले स्थापित किया गया था, मगर अब यह इस मिशन को निभाने में सक्षम नहीं रह गया है.
तुर्कीये के नेता ने मंगलवार को महासभा हॉल में कहा कि अधिक सटीकता के साथ यह कहा जा सकता है कि संगठन को अपना दायित्व निभाने के लिए असमर्थ बना दिया गया है.
राष्ट्रपति ऐरदोआन ने कहा कि यह समझने के लिए केवल पिछले एक वर्ष के घटनाक्रम को देखने की आवश्यकता है, जहाँ यूएन अपने आदर्शों पर खरा नहीं उतर पाया है. लाखों लोगों की ज़िन्दगियाँ समाप्त हो गईं और विशाल संख्या में अन्य को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी.
“पिछले 12 महीने, इतिहास में अतीत के 30 वर्षों के दौरान सबसे रक्तरंजित अवधि साबित हुए हैं. 60 से अधिक हिंसकट टकराव और ग़ाज़ा से यूक्रेन, रूस, म्याँमार, दारफ़ूर और ईरान से लेबनान तक धधकते युद्ध.”
उन्होंने कहा कि फ़लस्तीन, लेबनान, सूडान और अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों में जिन लोगों ने संयुक्त राष्ट्र से अपनी उम्मीदें बाँधी हुई थी, उन्हें गहरी निराशा हाथ लगी है.
तुर्कीये के नेता ने फ़लस्तीनी लोगों की व्यथा को बयाँ करते हुए कहा कि ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में जो लोग अन्याय का सामना कर रहे हैं, उनकी स्थिति से मानवता की चेतना को गहरा घाव लगा है.
राष्ट्रपति ऐरदोआन ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार के प्रयासों को अपना समर्थन देते हुए आशा जताई कि यह प्रक्रिया, अगले महासचिव के नेतृत्व में भी जारी रहेगी. यूएन के नए महासचिव का कार्यकाल अगले वर्ष जनवरी में शुरू होगा.
इनमें सुरक्षा परिषद में सुधार भी है, जोकि पाँच स्थाई सदस्यों और 10 अस्थाई सदस्यों से मिलकर बनी है. इन अस्थाई सदस्यों को दो वर्ष के कार्यकाल के लिए यूएन महासभा द्वारा चुना जाता है.
“हमें यह मानना होगा कि एक ऐसी प्रणाली, जिसमें 190 से अधिक देश केवल पाँच देशों की मनमर्ज़ी पर निर्भर हों, वह एक न्यायसंगत व्यवस्था नहीं है और न ही भरोसा स्थापित करने या प्रेरित करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम है.”
उनके अनुसार दुनिया, इन पाँच देशों से कहीं अधिक बड़ी है.
राष्ट्रपति ऐरदोआन ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत, ताक़तवर और कमज़ोर, दोनों के साथ समान रूप से बर्ताव होना चाहिए. दंडमुक्ति की भावना को आम बना देने वाली अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था का क्षरण होना अवश्यंभावी है.