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एलजीबीटीआईक्यू+ व्यक्तियों के ख़िलाफ़ हिंसा और भेदभाव व्यापक रूप से जारी है. स्कूलों में भी स्थिति चिन्ताजनक है, जहाँ 45 प्रतिशत एलजीबीटी युवाओं ने बताया कि उन्हें तंग किया गया या डराया-धमकाया गया. यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने इन प्रवृत्तियों की निन्दा की है.