Farmer Protest Update: गौतमबुद्ध नगर में संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे किसानों के आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन का समर्थन मिल गया है। किसानों की राजधानी कहे जाने वाले मुजफ्फरनगर के सिसौली में मंगलवार को भाकियू की पंचायत हुई। जिसमें फैसला लिया गया कि पश्चिमी यूपी के किसान भी बुधवार को नोएडा की और कुच करेंगे।
भारतीय किसान यूनियन ने गौतमबुद्ध नगर में किसानों की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताते हुए आपातकालीन पंचायत बुलाई थी। पंचायत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने ऐलान किया कि पश्चिमी यूपी के किसान भी बुधवार को नोएडा की और कूच करेंगे। पश्चिमी यूपी के 5 मंडलों के किसान कल नोएडा कूच करेंगे।
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ग्रेटर नोएडा के जीरो पॉइंट पर कल किसानों की बड़ी पंचायत होनी है। इसमें पश्चिमी यूपी के किसान बड़ी संख्या में शामिल होंगे। किसान भवन सिसौली में हुई भारतीय किसान यूनियन की पंचायत में प्रदेश के अन्य जनपदों के थानों में भी प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया है।
160 किसानों की हुई गिरफ्तारी
गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने मंगलवार को भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष सुखबीर यादव ‘खलीफा’ सहित 160 से अधिक प्रदर्शनकारी किसानों को गिरफ्तार किया। किसान भूमि मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर दिल्ली कूच करने से रोके जाने के बाद नोएडा में स्थित ‘दलित प्रेरणा स्थल’ पर धरना दे रहे थे। पुलिस ने बताया कि भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा, भारतीय किसान यूनियन (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के प्रदेश अध्यक्ष पवन खटाना, किसान नेता रूपेश वर्मा, सुनील फौजी, सुनील प्रधान, उदल यादव और अमन भाटी समेत कई किसान नेताओं को गिरफ्तार किया गया है।
सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई अपनी जमीन के लिए उचित मुआवजे की मांग को लेकर ये किसान सोमवार को महामाया फ्लाईओवर के पास एकत्र होकर दिल्ली के लिए रवाना हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें दलित प्रेरणा स्थल के पास रोक लिया था। जिसके बाद वहीं किसान धरने पर बैठ गए थे। पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था शिव हरि मीणा ने बताया कि पुलिस ने दोपहर करीब डेढ़ बजे 160 से ज्यादा किसानों को गिरफ्तार कर लिया।
क्या हैं किसानों की मांगें?
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने दावा किया कि मोर्चा अबकी बार किसानों की मांगों को हर हाल में पूरी करवा कर वापस लौटेगा। उन्होंने बताया कि किसान अधिगृहित जमीन के एवज में मिलने वाले सात प्रतिशत और पांच प्रतिशत भूखंड के बदले 10 प्रतिशत भूखंड आवंटन की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों में नये भूमि अधिग्रहण कानून के सभी लाभों को लागू करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि 10 फीसदी भूखंड आवंटन का मसला वर्षों से लंबित है।
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