मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय रुपया थोड़ी कमजोरी के साथ खुला। हालांकि, अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने गिरावट को कुछ हद तक थाम लिया। उन्होंने आगे कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने के रुझान (risk aversion) के कारण रुपया थोड़ी कमजोरी के साथ कारोबार कर सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और FII (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की ओर से बिकवाली का दबाव भी रुपये पर असर डाल सकता है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और RBI की ओर से कोई नया हस्तक्षेप रुपये को निचले स्तरों पर सहारा दे सकता है।