क्या ऐसा हो सकता है कि खेतों में लहलहाती फ़सल हुई हो, दुकानों व बाज़ारों में खाद्य सामग्री भी उपलब्ध हो, मगर फिर भी आम नागरिक भूखे पेट सोने के लिए मजबूर हों. अफ़ग़ानिस्तान में फ़िलहाल यही हालात हैं, जहाँ समस्या भोजन की कमी नहीं है बल्कि उसका अफ़ग़ान नागरिकों की पहुँच से दूर होना है.
अफ़ग़ानिस्तान में यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) की प्रवक्ता ओल्गा चेरेवको ने मंगलवार को राजधानी काबुल से जिनीवा में पत्रकारों को मौजूदा परिस्थितियों से अवगत कराया.
“भोजन उपलब्ध है, लेकिन लाखों लोगों की पहुँच से बाहर है. बेहतर वर्षा और कृषि उत्पादन से मदद मिली है, लेकिन कई सालों के सूखे के बाद एक अच्छी पैदावार, इतने लम्बे समय के सूखे से हुई क्षति की भरपाई नहीं कर सकती है.”
उन्होंने हाल ही में, अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी और पूर्वोत्तर इलाक़ों का दौरा किया है, जहाँ आम नागरिकों के सामने कई चुनौतियाँ हैं. नियमित आय की कमी, बुनियादी सेवाओं तक पहुँच या फिर किसी संकट के समय गुज़ारे के लिए साधन.
पिछले कई दशकों से हिंसक टकराव व अस्थिरता की चपेट में आया अफ़ग़ानिस्तान, अगस्त 2021 में तालेबान द्वारा सत्ता हथिया लिए जाने के बाद से मानवीय संकट व आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं पर पाबन्दियाँ थोपी गई हैं और उन्हें अपने दैनिक जीवन के हर पहलु में अंकुशों का सामना करना पड़ रहा है.
पिछले कुछ वर्षों में, अन्य देशों में शरण लेने वाले लाखों अफ़ग़ान नागरिक, ईरान और पाकिस्तान से अपनी वतन वापसी के लिए मजबूर हुए हैं, जिससे स्थानीय समुदायों व तंत्र पर बोझ बढ़ा है.
यूएन की साझेदारी में विश्व भर में खाद्य सुरक्षा पर नज़र रखने वाले प्लैटफ़ॉर्म (Integrated Food Security Phase Classification (IPC) का नवीनतम विश्लेषण दर्शाता है कि अफ़ग़ानिस्तान में, 1.59 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. 34 लाख लोग, आपात स्तर पर भोजन की कमी से जूझ रहे हैं, जोकि अकाल से पहले की स्थिति है.
नवम्बर 2026 से अगले वर्ष अप्रैल के दौरान स्थिति बद से बदतर हो सकती है जब भूख से पीड़ितों की संख्या 1.9 करोड़ तक पहुँच सकती है. आईपीसी विश्लेषण में भूख सम्बन्धी स्थिति को पाँच वर्गों में विभाजित किया जाता है:
अनुमान है कि छह महीने से पाँच वर्ष की आयु के 40 लाख से अधिक बच्चों को अगले वर्ष कुपोषण के उपचार की आवश्यकता हो सकती है.
ओल्गो चेरेवको ने बताया कि देश के इन इलाक़ों का दौरा करने के बाद उन्हें महसूस हुआ है कि वर्तमान संकट, केवल भोजन की उपलब्धता या अभाव से नहीं जुड़ा है. बल्कि यह है कि लोगों के पास उसे ख़रीदने की सामर्थ्य है या नहीं.
यूएन कार्यालय प्रवक्ता ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और लड़कियो के साथ व्यवस्थागत ढंग से भेदभाव जारी है. “जब एक लड़की के लिए माध्यमिक शिक्षा को नकार दिया जाता है, तो उसके दुष्परिणाम कक्षा से दूर तक जाते हैं.”
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने चेतावनी दी थी कि यदि देश में वर्तमान पाबन्दियाँ जारी रहीं, तो वर्ष 2030 तक 20 हज़ार महिला शिक्षकों और 5,400 महिला स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है.
उन्होंने कहा कि देश में पोषण की भी चिन्ताजनक स्थिति है. कुपोषण केवल भोजन के अभाव से नहीं है, बल्कि यह मातृत्व स्वास्थ्य, स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच, आहार की विविधता, शिक्षा और आय कमाने की क्षमता से भी जुड़ी है.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सर्दी के मौसम से पहले मानवीय सहायता बहुत आवश्यक है और इसे निरन्तर जारी रखना होगा. इसके समानान्तर, कृषि व ग्रामीण आजीविकाओं, स्थानीय बाज़ारों, रोज़गार, जल प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश करना होगा और आर्थिक जीवन में महिलाओं की भागेदारी सुनिश्चित की जानी होगी.