बांग्लादेश की राजधानी ढाका की एक झुग्गी में रहने वाली, 14 वर्षीया बुशरा का विवाह उसकी इच्छा के बिना ही कर दिया गया था. लेकिन अब वह एक स्कूल में है और एक पायलट बनना चाहती है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) द्वारा समर्थित एक बाल संरक्षण केन्द्र और स्थानीय समुदाय के नेताओं की मदद से यह सम्भव हो पाया.
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने हाल ही में अपनी तीन-दिवसीय बांग्लादेश यात्रा के दौरान ऐसी अनेक कहानियों व व्यथाओं को सुना, जहाँ लगभग हर दूसरी लड़की का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले कर दिया जाता है.
यूनीसेफ़ प्रमुख ने इस समस्या से निपटने के लिए निवेश और तीन मोर्चों पर कार्रवाई का आग्रह किया है:
कैथरीन रसैल ने कहा कि लड़कियों के लिए स्कूली पढ़ाई को जारी रखने, और उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा व संरक्षण सेवाएँ मुहैया कराने से उनके, समुदाय और देश के उज्ज्वल भविष्य को साकार किया जा सकता है.
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के कुरैल में सबसे बड़ी अनौपचारिक बस्ती है, जहाँ यूनीसेफ़ की शीर्ष अधिकारी बच्चों और अभिभावकों से बातचीत के दौरान जाना कि निर्धनता, शिक्षा में व्यवधान और सीमित बुनियादी सेवाओं से उनका जीवन किस तरह से प्रभावित हो रहा है.
किशोर लड़कियों ने अपनी महत्वाकाँक्षाओं को साझा किया और उन दबावों को भी, जिनकी वजह से उन्हें स्कूलों से बाहर निकाल कर उनका विवाह कर दिया जाता है.
बांग्लादेश के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 20 से 24 वर्ष आयु की 47 प्रतिशत से अधिक लड़कियों का विवाह 18 साल की उम्र से पहले ही कर दिया गया था. कम आयु में शादी होने के कारण लड़कियाँ, स्कूली शिक्षा से वंचित हो जाती हैं, जल्द गर्भधारण के मामले बढ़ते हैं और जीवन पर्यन्त अवसरों में कमी आती है.
इसके मद्देनज़र, यूनीसेफ़ ने लड़कियों के लिए माध्यमिक स्कूल शिक्षा को पूरी करने का आग्रह किया है. साथ ही, उन क़ानूनी ख़ामियों से भी निपटा जाना होगा, जिनकी वजह से बाल विवाह को रोका नहीं जाता.
यूनीसेफ़ अधिकारी ने बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर का दौरा किया, जहाँ रोहिंग्या परिवारों ने आश्रय लिया हुआ है.
यहाँ यूनीसेफ़ द्वारा समर्थित एक केन्द्र पर छात्रों और शिक्षकों ने शिक्षा और वैकल्पिक रोज़गारों की अहमियत के बारे में बात की. सीखने-सिखाने के अलावा, शिक्षा के ज़रिए बच्चों को शोषण, तस्करी, बाल विवाह और हथियारबन्द गुटों द्वारा लड़ाकों के रूप में भर्ती किए जाने से बचाया जा सकता है.
कार्यकारी निदेशक ने बताया कि हिंसा, विस्थापन और अनिश्चितता की वजह से रोहिंग्या बच्चों ने बहुत कुछ खोया है. अब उनसे उनकी शिक्षा को नहीं छीना जा सकता है. “दुनिया को उनमें निवेश करना होगा, और उनका स्वागत करने वाले समुदायों में भी.”
यूनीसेफ़, कॉक्सेस बाज़ार में रोहिंग्या शरणार्थी बच्चों व परिवारों के लिए जीवनरक्षक व आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था में जुटा है. संगठन की शीर्ष अधिकारी ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि इन प्रयासों के लिए समर्थन जारी रखे जाने की आवश्यकता है.