मानवाधिकार मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी, वोल्कर टर्क ने योरोप के अनेक देशों में हाल के दिनों में हुए विरोध प्रदर्शनों, हिंसा व आगज़नी और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से उपजे हालात पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है. उन्होंने कहा है कि लोगों को अपनी आवाज़ सुनाने का अधिकार है, आवश्यकता के अनुसार बल प्रयोग किया जाना होगा और तनाव में कमी लाने के लिए प्रदर्शनकारियों के साथ सार्थक सम्वाद करना होगा.
पिछले कुछ दिनों से योरोप के कई देशों, अल्बानिया, बेल्जियम, फ़्राँस, इटली और पुर्तगाल में बड़े पैमाने पर सामूहिक विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिनकी वजह बढ़ती महंगाई, आवास की क़िल्लत, बुनियादी सेवाओं की बदहाल व्यवस्था बताई गई है.
फ़्राँस की राजधानी पेरिस समेत अनेक शहरों और अन्य देशों में भी सड़कों पर विरोध प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें होने, लूटपाट व आगज़नी होने और लोगों को हिरासत में लिए जाने की ख़बरें हैं.
इस पृष्ठभूमि में, यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने मंगलवार को जारी अपने एक वक्तव्य में कहा कि बड़े पैमाने पर इन प्रदर्शनों से मानवाधिकारों के प्रति चिन्ता बढ़ रही है.
“मैं सभी हिंसक कृत्यों की निन्दा और सभी सम्बद्ध पक्षों से तनाव में कमी लाने और हिंसक घटनाओं की रोकथाम करने के लिए आग्रह करता हूँ.”
उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिए एकमात्र और सर्वोत्तम उपाय, समावेशी व सुरक्षित सम्वाद है.
उच्चायुक्त टर्क ने बच्चों समेत प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध अनावश्यक और अत्यधिक बल प्रयोग की ख़बरों पर चिन्ता जताते हुए कहा कि देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि क़ानून व्यवस्था के लिए उठाया गया कोई भी क़दम वैध, आवश्यक व आनुपातिक हो.
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने ध्यान दिलाया कि लोगों के पास शान्तिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने और अपनी आवाज़ को सुनाने का अधिकार है. देशों को इन अधिकारों का इस्तेमाल करने की अनुमति देनी चाहिए.
“मैं उन लोगों के कृत्यों की भर्त्सना करता हूँ, जो इन प्रदर्शनों का इस्तेमाल हिंसक घटनाओं को अंजाम देने और सार्वजनिक व निजी सम्पत्तियों की तोड़फोड़ करने के लिए कर रहे हैं. उन्हें व्यक्तिगत रूप से इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.”
उन्होंने कहा कि ग़ैरक़ानूनी ढंग से बल प्रयोग के आरोपों की तत्काल, स्वतंत्र जाँच की जानी होगी और पीड़ितों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित की जानी ज़रूरी है.
“मुझे स्थानीय प्रशासन द्वारा घटनाओं की जाँच करने और तनाव में कमी लाने के लिए उठाए गए कुछ क़दमों के बारे में जानकारी है. मैं देशों से और आग्रह करता हूँ कि प्रदर्शनकारियों, विशेष रूप से युवाओं के साथ, एक सार्थक, समावेशी सम्वाद के लिए सम्पर्क करें.”
साथ ही, शिक्षा, सार्वजनिक सेवाओं, आवास, जीवन-व्यापन की बढ़ती क़ीम और असमानता से जुड़ी बुनियादी चिन्ताओं से निपटने के लिए ठोस क़दम उठाए जाने होंगे.