संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने यमन में हिंसक टकराव के बीच, हूथी लड़ाकों द्वारा ताइज़ शहर की घेराबन्दी किए जाने पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है, जिसकी वजह से मानवीय सहायता व आवश्यक सामान की आपूर्ति अवरुद्ध हो जाने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने भी आगाह किया है कि ताइज़ में भोजन, स्वच्छ जल और आश्रय का अभाव है और बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है.
हूथी लड़ाकों और अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के सुरक्षा बलों के बीच पिछले कुछ हफ़्तों में नए सिरे से लड़ाई भड़की है और 2.5 लाख लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर भाग गए हैं.
हिंसा से देश का तीसरा सबसे बड़ा शहर, ताइज़ सबसे अधिक प्रभावित है, जिसे अदन से जोड़ने वाले एकमात्र आपूर्ति मार्ग को हूथी लड़ाकों ने बन्द कर दिया है. इस वजह से आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतों में उछाल आया है और बड़ी संख्या में लोगों के पास भोजन व बुनियादी सामान के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं.
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने मंगलवार को अपने एक वक्तव्य में हूथी लड़ाकों से ताइज़ में मानवीय सहायता की तत्काल आपूर्ति की अनुमति देने की अपील की है. 1 अगस्त से 19 अक्टूबर के दौरान, ताइज़ में अब तक 32 आम नागरिकों के मारे जाने की ख़बर है, जिनमें 14 बच्चे और नौ महिलाएँ हैं.
ताइज़ में स्थिति विशेष रूप से चिन्ताजनक है चूँकि लड़ाई के कारण विस्थापित होने वाले 50 फ़ीसदी से अधिक लोगों ने यहीं पर शरण ली हुई है. उन्होंने आशंका जताई है कि जैसे-जैसे लड़ाई शहर के घनी आबादी वाले इलाक़ों की ओर बढ़ेगी, हताहत होने वाले आम लोगों का आँकड़ा भी बढ़ेगा.
पिछले महीने, हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह गुट) और अदन में स्थित अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के सुरक्षा बलों के बीच फिर से झड़पें शुरू हो गई थी. 2022 में हुए संघर्षविराम के बाद यमन में पसरी अपेक्षाकृत शान्ति अब टूट गई है.
सितम्बर में हूथी लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट पर अपना दबदबा बढ़ाते हुए कुछ इलाक़ों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था, जिसके बाद, सरकारी सुरक्षा बलों ने राजधानी सना और अन्य इलाक़ों को अपने नियंत्रण में लेने के लिए जवाबी अभियान छेड़ा है.
सऊदी अरब ने हवाई कार्रवाई के ज़रिए इसे अपना समर्थन दिया, मगर, इसके जवाब में हूथी लड़ाकों ने सऊदी अरब पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए हैं.
यमन में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के प्रतिनिधि अखिल अय्यर ने बताया है कि बड़ी संख्या में लोग बार-बार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं. वे भीड़भाड़ वाले शिविरों या ऐसे समुदायों में पहुँच रहे हैं, जहाँ भोजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है.
“जब वे पहुँचते हैं तो वहाँ स्वच्छ जल का लगभग नामोनिशान नहीं हैं. वे सिर्फ़ अपनी कमर पर कपड़े लादकर आए हैं और उनके पास गुज़ारे के लिए कुछ नहीं है.”
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, ताइज़ के लड़ाई प्रभावित इलाक़ों में आटा लगभग समाप्त होता जा रहा है. एक ऐसे इलाक़े में जहाँ सबसे अधिक खाद्य असुरक्षा है, वहाँ यह स्थिति ख़तरे का अलार्म है.
उन्होंने अदन से पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि मानवीय सहायता एजेंसियों के लिए सम्वेदनशील परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों तक राहत, ईंधन और अन्य आवश्यक सामान पहुँचाना कठिन हो गया है.
यमन पहले से ही हैज़ा और ख़सरे के प्रकोप में है और अब डिप्थीरिया व डेंगू के संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक आपात स्थिति की आशंका पनप रही है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया है कि ताइज़ के 12 अस्पतालों में केवल चार दिन के लिए ईंधन बचा है. ऑक्सीजन के सिलेंडर की कमी है और 127 अति-आवश्यक दवाओं में से 115 के लिए केवल एक सप्ताह का ही भंडार है.