अफ़ग़ानिस्तान की आबादी का एक विशाल हिस्सा कुपोषण और पर्याप्त भोजन न मिल पाने की समस्या से जूझ रहा है और आने वाले महीनों में खाद्य सुरक्षा की स्थिति और बिगड़ने की आशंका है. इसके मद्देनज़र, यूएन एजेंसियों ने बढ़ते भूख संकट से निपटने के लिए आपात सहायता और वित्तीय संसाधनों का आग्रह किया है.
यूएन की साझेदारी में विश्व भर में खाद्य सुरक्षा पर नज़र रखने वाले प्लैटफ़ॉर्म (Integrated Food Security Phase Classification (IPC) में यह जानकारी साझा की गई है.
इसके अनुसार, पिछले कई दशकों से मानवीय संकट का सामना कर रहे अफ़ग़ानिस्तान में, 1.59 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. 34 लाख लोग, आपात स्तर पर भोजन की कमी से जूझ रहे हैं, जोकि अकाल से ठीक पहले की स्थिति है.
नवम्बर 2026 से अगले वर्ष अप्रैल के दौरान स्थिति बद से बदतर हो सकती है जब भूख से पीड़ितों की संख्या 1.9 करोड़ तक पहुँच सकती है.
इस वर्ष, 12 लाख से अधिक अफ़ग़ान नागरिक ईरान और पाकिस्तान से वापिस अपने देश लौटने के लिए मजबूर हुए हैं, जिससे स्थानीय समुदायों व तंत्र पर बोझ बढ़ा है.
आईपीसी विश्लेषण के ज़रिए, किसी देश या क्षेत्र में भूख सम्बन्धी स्थिति की निगरानी की जाती है और उसे पाँच वर्गों में विभाजित किया जाता है:
आईपीसी के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष अगस्त से अक्टूबर की अवधि में कुपोषण रिकॉर्ड स्तर पर आंका गया और भूख से पीड़ित अफ़ग़ानों की संख्या भी बढ़ी.
आर्थिक दबाव की वजह से परिवारों पर बोझ बढ़ रहा है और 32 प्रतिशत आबादी संकट स्तर (चरण 3) पर या उससे अधिक खाद्य असुरक्षा की चपेट में है. 34 लाख लोग आपात स्तर पर (चरण 4) में भोजन की कमी का सामना कर रहे हैं.
बीमारियों का फैलाव, पर्याप्त जल की क़िल्लत, साफ़-सफ़ाई व स्वच्छता व्यवस्था का अभाव, हालात को और गम्भीर बना रहा है, जबकि पोषण सेवाओं तक लोगों की पहुँच में कमी आई है.
विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष नवम्बर से अगले साल अप्रैल के दौरान, संकट स्तर पर खाद्य असुरक्षा की चपेट में आए अफ़ग़ान नागरिकों की संख्या बढ़कर 1.9 करोड़ पहुँच सकती है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने गुरूवार को अपनी एक अपील में खाद्य सहायता का स्तर बढ़ाने के लिए वित्तीय संसाधनों का आग्रह किया है. साथ ही, कृषि गतिविधियों के लिए समर्थन और कुपोषण के उपचार व रोकथाम पर बल दिया गया है.
अफ़ग़ानिस्तान में यूएन एजेंसी के देशीय निदेशक जॉन ऐलिफ़ ने बताया कि यदि तत्काल समर्थन मुहैया कराया जा सके, तो स्थानीय परिवार गरिमा के साथ सर्दी के मौसम में गुज़र-बसर कर सकेंगे.
मगर, इसके अभाव में, अनेक लोगों को असम्भव विकल्पों को अपनाना पड़ सकता है, जबकि इसके लिए किसी भी अभिभावक को मजबूर नहीं होना चाहिए.
यूएन एजेंसियों का मानना है कि स्थायित्व के लिए अफ़ग़ान परिवारों को ऐसी आजीविका के अवसर मुहैया कराए जाने अहम हैं, जिन पर वो निर्भर रह सकें और आने वाले दिनों में झटकों का सामना करने के लिए तैयार हों.