विश्व भर में, गर्भावस्था के दौरान एक महिला के स्वास्थ्य पर उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन का गम्भीर असर हो सकता है और हर वर्ष लाखों महिलाएँ इससे प्रभावित होती हैं. यह माँ और नवजात शिशु की मौत होने की एक बड़ी वजह है, जिससे निपटने के लिए एक नए रोडमैप को पेश किया गया है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी का अनुमान है कि गर्भावस्था के लगभग 10 से 15 फ़ीसदी मामलों में उच्च रक्तचाप, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या सामने आती हैं, जोकि उनमें गम्भीर बीमारी और परिवारों के लिए चुनौती साबित हो सकता है.
यह मातृत्व मौतों की कुल संख्या के 16 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार है – हर साल लगभग 42 हज़ार मौतें. वहीं, इस वजह से पाँच लाख से अधिक नवजात शिशुओ की या तो मौत हो जाती है या वे मृत पैदा होते हैं.
बहुत से देशों में, महिलाओं के पास अब भी ब्लड प्रेशर मापने के लिए बुनियादी उपकरण उपलब्ध नहीं हैं. मूत्र में प्रोटीन की परीक्षण सुविधा और अति-आवश्यक दवाओं, जैसेकि ऐस्प्रिन, मैग्निशियम सल्फ़ेट और ब्लड प्रेशर नियंत्रण का अभाव भी एक समस्या है.
समय पर रक्तचाप की जाँच, परीक्षण और दवाएँ, जीवन और मौत का अन्तर साबित हो सकता है.
प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की क़िल्लत और आपात स्थिति में प्रसूति सेवा की सीमित उपलब्धता की वजह से अक्सर जीवनरक्षक देखभाल मुहैया करा पाना कठिन हो जाता है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी में यौन, प्रजनन, मातृत्व व बाल मामलों के लिए निदेशक डॉक्टर पास्काले ऐलॉटी ने कहा कि प्री-ऐक्लेम्पसिया, किसी भी गर्भावस्था में हो सकता है.
इससे तात्पर्य, गर्भावस्था में होने वाली जटिलताओं से है, जिसमें गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर, मूत्र में प्रोटीन की मात्रा बढ़ सकती है, और यह गुर्दों समेत शरीर के अन्य अंगों को नुक़सान पहुँचा सकता है.
डॉक्टर ऐलॉटी ने कहा कि यह घातक साबित होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि महिला के रक्तचाप की समय पर जाँच हुई, या स्वास्थ्य बिगड़ने पर उचित देखभाल मुहैया कराई गई या नहीं.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर जिस नए रोडमैप को जारी किया है, उसमें स्वास्थ्य केन्द्र पर उपचार के लिए दिशानिर्देश, दवाओं व निदान सेवाओं तक पहुँच, शोध व नवाचार समेत अन्य क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर की समस्या और उन ज़रूरी दवाओं की उपलब्धता में एक बड़ी खाई है, जिससे इस अवस्था का उपचार किया जा सके. रोकथाम व उपचार उपायों में निवेश लम्बे समय से एक चुनौती है.
यूएन एजेंसी ने भविष्य में निवेश के लिए उन क्षेत्रों की पहचान की है, जिनसे गर्भावस्था में हाइपरटेंशन विकार का समय रहते अनुमान लगाने, पता लगाने और ज़रूरी होने पर उपचार किया जा सके.
WHO ने देशों की सरकारों, शोधकर्ताओं, नागरिक समाज और विकास साझेदारों से आग्रह किया है कि यह सुनिश्चित करना होगा कि समाधानों और नवाचारी उपायों को उन महिलाओं व शिशुओं तक पहुँचाया जा सके, जिन्हें इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है.