चुंबकीय क्षेत्र आर्सेनिक-युक्त लोहे के कणों और कोलॉइड को अलग करता है। इससे पानी साफ हो जाता है। इस पृथक्करण प्रक्रिया में रसायन और फिल्टर की जरूरत नहीं होती है। इस मशीन को लगाने से पहले पानी की व्यापक जांच की जाती है। अभी 13 सर्टिफाइड स्थलों पर इसका इस्तेमाल हो रहा है। भोजपुर और बक्सर के स्कूलों में हुए परीक्षणों में 109 से 141 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक आर्सेनिक वाले पानी को उपचार के बाद 2 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से नीचे लाने में सफलता मिली है।