काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआर काँगो) में हिंसा और असुरक्षा की भावना की वजह से हज़ारों लोग एक विस्थापन शिविर से भागने के लिए मजबूर हुए हैं, जिससे घातक इबोला वायरस पर क़ाबू पाने की कोशिशों को झटका लगा है.
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, 20 सितम्बर को देश के पूर्वोत्तर इतुरी प्रान्त में सुरक्षा बलों ने एक विस्थापन शिविर में हथियारों और ग़ैर-सरकारी हथियारबन्द गुटों के संदिग्ध लड़ाकों की तलाश में धावा बोला. इस कार्रवाई के दौरान गोलीबारी की आवाज़ भी सुनाई दी गई.
इस घटना के बाद बुनिया में स्थित किगोन्ज़े नाम शिविर से अनेक परिवारों ने सुरक्षा की तलाश में अन्य इलाक़ों का रुख़ किया है.
परिवारों के विस्थापन शिविर से तितर-बितर हो जाने की वजह से सार्वजनिक स्वास्थ्य चिन्ताएँ उपजी हैं, चूँकि किगोन्ज़े शिविर, इबोला पर नियंत्रण पाने के लिए चिन्हित इलाक़ों में है.
डीआर काँगो में इबोला संक्रमण के लिए वायरस का बुंडिबुग्यो नामक प्रकार ज़िम्मेदार है, जोकि अब तक देश में बीमारी का सबसे बड़ा और घातक प्रकोप साबित हो रहा है और 2018-2020 की आपात स्थिति को पीछे छोड़ चुका है.
मानवीय सहायता के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) के अनुसार, इस शिविर में 19 हज़ार विस्थापितों ने शरण ली हुई थी, जहाँ वे हथियारबन्द हिंसा, डराए-धमकाए जाने, गिरफ़्तारी, जबरन विस्थापन और आश्रय स्थलों को नुक़सान पहुँचाने समेत अन्य कठिनाइयों से जूझ रहे थे.
डीआर काँगो का पूर्वी हिस्सा प्राकृतिक संसाधनो से समृद्ध है, लेकिन अनेक दशकों से हिंसक टकराव का शिकार है, जहाँ गम्भीर मानवीय स्थिति है. पिछले कुछ महीनों में इबोला वायरस के फैलाव से स्थिति और जटिल हुई है.
डीआरसी के इतुरी प्रान्त में 11 लाख लोग हिंसक टकराव की वजह से विस्थापित हैं और 3.73 लाख लोगों ने विभिन्न विस्थापन शिविरों में शरण ली हुई है.
स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने बताया है कि इस वर्ष, इबोला संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या पहली बार 8 हज़ार के आँकड़े को पार कर गई है. नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 8,067 संक्रमितों की पुष्टि हुई है और 3,901 मौतें हुई हैं. इस संक्रमण के कारण मृत्यु दर 48.4 प्रतिशत आंकी गई है.
हिंसा व असुरक्षा की वजह से किगोन्ज़े शिविर तक मानवीय सहायताकर्मियों का पहुँच पाना कठिन है. लोगों के वहाँ से बाहर अन्य इलाक़ों में जाने से इबोला के प्रकोप पर क़ाबू पाने की कोशिशें जटिल साबित हो सकती हैं.
डीआर काँगो में यूएन के मानवतावादी समन्वयक डेमियन मामा ने बताया कि ज़रूरतों का आकलन करने, अति-आवश्यक सेवाएँ मुहैया कराने और संरक्षण प्रदान करने में चुनौतियाँ पेश आ रही हैं.
यूएन एजेंसियों का मानना है कि हज़ारों लोगों के विस्थापन शिविरों से जाने की वजह से इबोला संक्रमण के फैलाव की निगरानी करना कठिन साबित हो सकता है, विशेष रूप से संक्रमितों के सम्पर्क में आए लोगों का पता लगाना.
इतुरी को इबोला के प्रकोप का केन्द्र माना जाता है और अगस्त महीने की तुलना में वहाँ पर हाल के दिनों में संक्रमण मामलों की रफ़्तार में कमी आई है, हालांकि यह अब भी तेज़ी से फैल रहा है.
इससे पहले, 2014-2016 में पश्चिम अफ़्रीका में इबोला महामारी ने अनेक देशों को अपनी चपेट में ले लिया था और गिनी, लाइबेरिया, सिएरा लियोन में 28 हज़ार से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हुए थे और 11 हज़ार की जान गई थी.