NTA ने यूजीसी-नेट परीक्षा के तीन प्रमुख विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्नपत्र फिर से आयोजित करने का बड़ा फैसला लिया है। एनटीए ने स्पष्ट किया है कि इस दोबारा परीक्षा का असर पास होने वाले छात्रों की संख्या या उनके विषय-वार आवंटन पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।
उम्मीदवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह पुन: परीक्षा बिना किसी अतिरिक्त फीस के आयोजित की जाएगी। एजेंसी ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि यह कदम उनके हित में उठाया गया है, ताकि किसी भी योग्य छात्र का नुकसान न हो।
NTA को परीक्षा के बाद छात्रों से कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। समिति की जांच में सामने आया कि तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में कई तथ्यात्मक, स्पेलिंग, अनुवाद और व्याकरण संबंधी गलतियां थीं। विद्वानों के नाम, किताबों के शीर्षक और कई प्रश्नों के विकल्प गलत छापे गए थे। इसके अलावा, पुरानी परीक्षाओं के कई प्रश्न ज्यों के त्यों दोहराए गए थे। परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समिति ने दोबारा परीक्षा कराने की सिफारिश की।
इस गड़बड़ी के बाद NTA अपने आंतरिक नियमों और प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया जैसे प्रश्न बनाना, अनुवाद करना और जांचना को मजबूत कर रहा है। एजेंसी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए अपने प्रोटोकॉल की समीक्षा कर रही है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब एनटीए को परीक्षाओं के आयोजन को लेकर छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों जैसे कि NSUI, SFI AISA के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं Answer Key जारी करने में हुई देरी और नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े हालिया विवादों के कारण भी एजेंसी पर सवाल उठ रहे थे। यूजीसी-नेट परीक्षा देशभर के विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर की भर्ती, पीएचडी में प्रवेश और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। एनटीए का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए ही यह सुधारात्मक कदम उठाया गया है।
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