डॉ नारायणन ने कहा कि गगनयान, स्पेस स्टेशन, चंद्रयान-4, और भविष्य के बड़े लॉन्च व्हीकल सिर्फ साइंटिफिक उपलब्धियां नहीं हैं। वे प्राइवेट कंपनियों के लिए नई टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और काम के नए एरिया भी शुरू कर सकते हैं।जैसे-जैसे स्पेस मि न की संख्या और कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ेगी वैसे ही लॉन्च सिस्टम, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस कम्युनिकेशन, डेटा और दूसरे स्पेस एप्लीकेशन से जुड़े एरिया में भी एक्टिविटी बढ़ेगी। यही वजह है कि स्पेस सेक्टर में सुधारों के बाद भारत में स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या को अहम माना जा रहा है। आने वाले सालों में ISRO के सरकारी मिशन के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों की भूमिका कैसे बढ़ती है, यह भारत की स्पेस इकॉनमी के विकास के लिए बहुत जरूरी होगा।