लेकिन डायनेमिक प्राइस बैंड वाले शेयर में मामला अलग है। यहां शुरुआती ऑपरेटिंग रेंज 10% हो सकती है। अगर शेयर लगातार नीचे जाता है और तय शर्तें पूरी होती हैं, तो एक्सचेंज इस रेंज को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा सकता है। NSE के नियमों में शुरुआती दो फ्लेक्सिंग के दौरान रेंज 5-5% बढ़ाने का प्रावधान है। इसके बाद भी तय प्रक्रिया के तहत फ्लेक्सिंग जारी रह सकती है।