हिमालय क्षेत्र में घातक बाढ़ की घटनाओं से लेकर योरोपीय देशों के जंगलों में आग और झुलसा देने वाली गर्मी तक, बदलती जलवायु और उसके दुष्परिणामों ने 2026 के दौरान बार-बार आगाह किया है. यह स्पष्ट है कि आम नागरिकों की जलवायु संकट से रक्षा और जलवायु परिवर्तन की वजह बनने वाली हानिकारक ग्रीनहाउस गैस में तेज़ कटौती के लिए जल्द क़दम उठाए जाने होंगे. इसी सिलसिले में, विश्व नेताओं ने कार्रवाई की अपनी प्राथमिकताएँ तय करने के लिए बुधवार को महासभा के 81वें सत्र के दौरान एक बैठक में चर्चा की.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु शिखर बैठक 2026 को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम पहली पीढ़ी हैं, जिसके पास जीवाश्म ईंधन के युग को समाप्त करने के लिए उपाय हैं. “और वो अन्तिम पीढ़ी जो जलवायु विनाश को टाल सकती है.”
उन्होंने सभी देशों से ऐसे ठोस रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया, जिनमें जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए स्पष्ट समयसीमाएँ हों.
यूएन महासचिव की यह अपील न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान आयोजित जलवायु शिखर बैठक 2026 के दौरान जारी की गई है, जिसमें बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, जलवायु दृष्टि से सम्वेदनशील देशों और मुख्य ऊर्जा उत्पादक देशों के प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं. उद्देश्य है, त्वरित जलवायु कार्रवाई और ठोस सहयोग पर बल.
उन्होंने कहा कि दुनिया जलवायु न्याय के लिए कराह रही है. ग्रीनहाउस गैसों में कटौती, अनुकूलन उपायों और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के लिए. “हमें इस पुकार का जवाब कार्रवाई से देना होगा.”
महासचिव ने बताया कि ऐसे समय जब ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती दर्ज की जानी चाहिए, उनमें अब भी वृद्धि हो रही है.
उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन कम्पनियाँ “अप्रत्याशित रूप से बड़ा मुनाफ़ा कमा रही हैं, जबकि इसकी क़ीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है.”
वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनिया अस्थाई रूप से औद्योगिक-पूर्व के स्तर की तुलना में तापमान वृद्धि की 1.5°C सीमा को पार कर जाएगी, जिसे 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित किया गया था.
महासचिव ने कहा कि चुनौती यह है कि इस सीमा से होने वाली अतिरिक्त वृद्धि को जितना सम्भव हो सके, कम और कम अवधि का रखा जाए.
यूएन प्रमुख ने नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता को तीन गुना करने, ऊर्जा दक्षता में दोगुना वृद्धि लाने, तेज़ विद्युतीकरण, मीथेन उत्सर्जन में भारी कटौती और वनों की कटाई रोकने का आहवान किया.
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बिजली की तेज़ी से बढ़ती मांग को, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ी मांग भी शामिल है, और अधिक नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड व ऊर्जा भंडारण की मदद से पूरा किया जाना होगा.
महासचिव गुटेरेश ने विकासशील देशों के लिए हर वर्ष कम से कम 300 अरब डॉलर जुटाने का आग्रह किया, जिसकी अगुवाई विकसित देशों को करनी होगी. साथ ही, वर्ष 2035 तक जलवायु मद में वित्तीय संसाधनों को बढ़ाकर 1,300 अरब डॉलर प्रतिवर्ष किया जाना होगा.
उन्होंने प्रदूषण फैलाने के लिए ज़िम्मेदार पक्षों से इसकी क़ीमत चुकाने की मांग की, और आपदाओं के समय कर्ज़ के बोझ को कम करने व अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में विकासशील देशों की आवाज को मज़बूती देने पर बल दिया.
बुधवार को आयोजित शिखर बैठक में तीन महत्वपूर्ण पहल को भी पेश किया गया, जोकि उन व्यवहारिक अवरोधों से निपटने पर केन्द्रित हैं, जिनसे जलवायु कार्रवाई की गति धीमी होती है.
नई ग्लोबल ग्रिड्स एक्सेलेरेटर पहल, शुरुआत में अफ़्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया पर ध्यान केन्द्रित करेगी, जहाँ नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार उन बिजली नैटवर्क की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से हो रहा है, जिनके माध्यम से इस ऊर्जा को पहुँचाया जाना है.
दुनिया भर में फ़िलहाल, 2,500 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ बिजली ग्रिड से जुड़ने की प्रतीक्षा में हैं.
क्रिटिकल एनर्जी ट्रांज़िशन मिनरल्स टास्क फ़ोर्स के तहत दूसरी पहल गिनी, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, नाइजीरिया, ज़ाम्बिया और जिम्बाब्वे में लागू की जाएगी.
तांबा, लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे खनिजों की मांग वर्ष 2030 तक लगभग तीन गुना होने की सम्भावना है. इस पहल का उद्देश्य संसाधन-सम्पन्न विकासशील देशों को घरेलू स्तर पर अधिक मूल्य और रोज़गार पैदा करने में मदद करना है. साथ ही, शासन व्यवस्था और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को भी मज़बूती दी जाएगी.
इनके अलावा, सर्वजन को समय पूर्व चेतावनी प्रणाली के दायरे में लाने की पहल की वर्ष 2022 में शुरू किया गया था, और इसके तहत अब तक दो अरब डॉलर जुटाए गए हैं. इसका उद्देश्य, 2027 के अन्त तक, हर एक व्यक्ति को मौसमी घटनाओं से एक आरम्भिक चेतावनी प्रणाली के ज़रिए सुरक्षा प्रदान करना है.
इस पहल के लिए 160 से अधिक देशों से प्रत्यक्ष सहायता मिल रही है.