संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने यूएन महासभा के 81वें सत्र में अपने सम्बोधन के दौरान ईरान पर हालिया सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए, देशों से तेहरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने का आग्रह किया है. साथ ही, उन्होंने कहा कि उन्हें अब चयन यह करना है कि ईरान के साथ एक समझौता हो या फिर उसके विरुद्ध और अधिक सख़्त क़दम उठाए जाएं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार को जनरल डिबेट में अपने भाषण में अधिकाँश समय ईरान मुद्दे पर व्यतीत किया.
उन्होंने कहा कि ईरान, आतंक को प्रायोजित करने वाला ‘नम्बर एक’ देश है, और उनके प्रशासन ने एक ऐसे ख़तरे का सीधे तौर पर सामना किया है, जिससे निपटने में अतीत में पूर्व नेता विफल साबित हुए.
डॉनल्ड ट्रम्प ने महासभा हॉल में वार्षिक जनरल डिबेट के लिए जुटे विश्व नेताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि 51 वर्षों से, कट्टरपंथी ईरानी शासन व्यवस्था ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र और उससे इतर तबाही व अराजकता फैलाई है.
उन्होंने कहा कि, “मैं ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूँगा.”
राष्ट्रपति ट्रम्प के अनुसार, उनके प्रशासन ने परमाणु कार्यक्रम व आतंक के लिए समर्थन का अन्त करने के बदले में ईरान को आर्थिक सहयोग का प्रस्ताव दिया था. मगर तेहरान ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया.
“फिर ऑपरेशन मिडनाइट हैमर में, अमेरिकी सेना ने उसके परमाणु कार्यक्रम को मलबे के पहाड़ में नेस्तनाबूद कर दिया.”
उन्होंने दावा किया कि इसके बाद की गई सैन्य कार्रवाई में ईरान की सैन्य क्षमताओं में भारी कमी आई है, नौसेना, वायु प्रतिरक्षा प्रणाली व मिसाइल उत्पादन केन्द्रों को भीषण नुक़सान पहुँचा है.
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि दोतरफ़ा विकल्प हैं. या तो “इस्लामिक गणराज्य का विनाश कर दिया जाए, उसे ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया जाए जहाँ उनके पास बचने का कोई अवसर न हो और न ही भविष्य में महान बनने की कोई आशा.”
हालांकि उन्होंने सम्भावना जताई कि अन्तत: एक समझौते पर सहमति बन जाएगी. “मेरा विश्वास है कि हम एक समझौता कर लेंगे.”
उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय एकता की अपील करते हुए देशों से आग्रह किया कि ईरान को आर्थिक तौर पर तब तक पूरी तरह से अलग-थलग करना होगा, जब तक उसके द्वारा कमर्शियल जहाज़ों पर हमलों का अन्त न हो और आतंकवाद को समर्थन न रोका जाए.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी विदेश नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि पदभार सम्भालने के बाद से अब तक उन्होंने 8 हिंसक टकरावों का अन्त करने में मदद की है.
इनमें कम्बोडिया व थाईलैंड, कोसोवो व सर्बिया, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य व रवांडा, भारत व पाकिस्तान, आर्मीनिया व अज़रबैजान, और ग़ाज़ा में युद्ध शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच हिंसक टकराव पर विराम लगाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं और समय आ गया है कि मौतों के सिलसिले को रोका जाए.
राष्ट्रपति ट्रम्प ने बताया कि वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान वेनेज़ुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
अमेरिकी प्रशासन अब वेनेज़ुएला के नेताओं के साथ मिलकर, देश की आम जनता के बेहतर भविष्य के लिए प्रयासों में जुटा है. इसके तहत, दोनों देशों में तेल सम्पदा पर एक बड़ा समझौता हुआ है.
उधर, मैक्सिको में पार-राष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए कोशिशें की जा रही हैं. मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले बड़े गुटों को विदेशी आतंकी संगठन के रूप में चिन्हित किया गया है.
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि क्यूबा के साथ भी वार्ता जारी है और देश में मौजूदा हालात में बुनियादी बदलावों के लिए उनका प्रशासन क़दम उठाने के लिए तत्पर है.
उन्होंने ग्रीनलैंड के साथ एक समझौते की प्रशंसा की है जिस पर हस्ताक्षर होने हैं. इस आर्कटिक क्षेत्र को उन्होंने क्षेत्रीय व अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से अहम बताया है. डॉनल्ड ट्रम्प के अनुसार, डैनमार्क व ग्रीनलैंड के साथ समझौते से अमेरिका को इस क्षेत्र में सुरक्षा व अन्य आवश्यकताओं के लिए स्थाई नियंत्रण हासिल होगा.
अमेरिकी नेता ने अपने सम्बोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) को सुपर इंटैलीजेंस या परम बुद्धिमता का जाना चाहिए.
“कृत्रिम शब्द का इस्तेमाल इस बुद्धिमता को फ़र्ज़ी बनाता है. यह झूठी नहीं है. यह वास्तव में शानदार है.”
उनके अनुसार, आगामी वर्षों के दौरान आर्थिक व भूराजनैतिक प्रतिस्पर्धा में टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में नेतृत्व अहम होगा. “जो भी सुपर इंटैलीजेंस को जीतेगा, वही विजयी होगा.” उन्होंने कहा कि अमेरिका टैक्नॉलॉजी के विकास को प्रोत्साहित करते हुए, सम्भावित जोखिमों की भी निगरानी करता रहेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने महासभा के मंच से अनेक अन्तरराष्ट्रीय संगठनों व निकायों की आलोचना को फिर दोहराया.
डॉनल्ड ट्रम्प ने अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) को एक ऐसी संस्था क़रार दिया, जहाँ ‘दुष्ट व्यक्तियों’ की भरमार है. संयुक्त राज्य अमेरिका इसके न्याय अधिकार क्षेत्र में नहीं है और उन्होंने अन्य देशों से भी इस संगठन से क़दम वापिस खींचने का आग्रह किया है.
राष्ट्रपति ट्रम्प ने जिनीवा-स्थित यूएन मानवाधिकार परिषद की भी आलोचना की और कहा कि इसके द्वारा अन्य स्थानों पर दुर्व्यवहारों को नज़रअन्दाज़ करते हुए अमेरिका पर ही ध्यान केन्द्रित किया जाता है.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO), और अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की आलोचना करते हुए कहा कि अन्तरराष्ट्रीय निकायों को वैश्विक शासन व्यवस्था से जुड़े मामलों पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए.
अमेरिकी नेता ने अपने भाषण को समाप्त करते हुए देशों से वैश्विक चुनौतियों का सामना, साहस व संकल्प के साथ करने का आग्रह किया. उनके अनुसार, देशों के बीच सहयोग के ज़रिए पहले की तुलना में कहीं अधिक उज्ज्वल, आशावान व शानदार भविष्य को आकार दिया जा सकता है.