राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का खुलासा होने के बाद मंदिर प्रबंधन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। चंदा चोरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में पक्ष और विपक्ष के बीच खूब जुबानी जंग हुई। उसके बाद ये फैसला लिया गया कि राम मंदिर के प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक CEO नियुक्त किया जाए।