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सैन्य ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी नई तकनीकों की व्यापक उपलब्धता के कारण, परमाणु आतंकवाद का ख़तरा पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है. अगर कोई रेडियोलॉजिकल या परमाणु आतंवादी हमला होता है तो उसके मानवीय, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभाव, दुनिया भर में महसूस किए जाएँगे.