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दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में, प्रवासन अपने ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच चुका है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, इस क्षेत्र में लाखों लोग, बढ़ती महंगाई, अस्थिर रोज़गार बाज़ार और स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी बुनियादी ज़रूरतों की कमियों के कारण, जोखिम भरा पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं.