भारत के गोवा में आयोजित ‘अन्तरराष्ट्रीय पर्पल फ़ेस्ट 2025’ में विकलांगता पर चर्चा केवल नीतियों या रैम्प तक सीमित नहीं रही. ये बोर्डरूम, कक्षा और डिजिटल दुनिया तक पहुँची – जहाँ कामकाज का भविष्य तय हो रहा है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब कामकाज के नियमों को नए सिरे से लिख रही है. दुनिया भर में लाखों विकलांग व्यक्तियों के लिए यह “समान अवसर” का सबसे बड़ा साधन बन सकती है, जहाँ सहायक तकनीकें दैनिक जीवन में एक बड़ी शक्ति में बदल रही हैं.