शान्ति समझौतों, सुरक्षा सम्बन्धी सुधारों और पुनर्बहाली योजनाओं में महिलाएँ अहम भूमिका निभा रही हैं और पहले की तुलना में कहीं अधिक पीड़ितों को न्याय व ज़रूरी सेवाएँ हासिल भी हो रही हैं. मगर, उन्हें शान्ति वार्ताओं में अब भी समुचित प्रतिनिधित्व हासिल नहीं है और दंडमुक्ति की भावना के साथ उनके विरुद्ध यौन हिंसा को अंजाम दिया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सोमवार को ‘महिलाएँ, शान्ति व सुरक्षा’ के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की वार्षिक बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.