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वर्ष 2021 में, एक अफ़ग़ान महिला राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकती थी, अलबत्ता किसी महिला ने ऐसा किया नहीं. वर्ष 2025 में पहुँचें तो, महिलाएँ सार्वजनिक रूप से अपनी बात भी नहीं कह सकतीं. तालेबान का एक फ़रमान लागू है जो महिलाओं की सार्वजनिक स्थान पर अभिव्यक्ति को नैतिक उल्लंघन बताता है.