दुनिया भर में, भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और बढ़ते सूखे से, अरबों लोगों और अनगिनत प्रजातियों का भविष्य ख़तरे में है. विशेषज्ञों का कहना है कि टिकाऊ तरीक़े से खेतीबाड़ी करने, मिट्टी व जल स्रोतों की रक्षा करने और पर्याप्त निवेश जैसे उपायों से, अभी तक क्षतिग्रस्त हो चुके पारिस्थितिकी तंत्रों में फिर से जान फूँकी जा सकती है.