दुर्लभ प्रजातियों को बचाना हो या सतत जीवनशैली को बढ़ावा देना – एक स्वस्थ धरती ही समृद्ध समाज की नींव है. पेड़ लगाना, सफ़ाई करना या जागरूकता बढ़ाना – हर छोटा क़दम मायने रखता है, और जब ये क़दम युवाओं के हों, तो असर और भी गहरा होता है. विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (28 जुलाई) और अन्तरराष्ट्रीय युवा दिवस (12 अगस्त) के अवसर पर, आइए मिलते हैं एक ऐसी युवा कार्यकर्ता शिखा श्रीकान्त से, जो अपने जुनून व अनुभव से धरती की रक्षा में विशेष बदलाव ला रही हैं.