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19वीं सदी का भारत गरीबी, भेदभाव और सामाजिक चुनौतियों से घिरा हुआ था। ऐसे दौर में किसी आम इंसान का देशभर में नाम कमाना सपना ही लगता था। लेकिन एक अनाथ पारसी बालक ने न सिर्फ अपने जीवन को संवारा, बल्कि समाज को दिशा देने वाला भी बना