कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से दैनिक कामकाज में बड़े बदलाव आ रहे हैं. टैक्स्ट, वीडियो, संगीत समेत अन्य सामग्री को तैयार करना सरल हो गया है और हर दिन बीतने के साथ करोड़ों लोगों की निर्भरता इस पर बढ़ती जा रही है. मगर, इस टैक्नॉलॉजी के उभरने के साथ ही एक चिन्ता भी गहरा रही है: पर्यावरण पर इसका दुष्प्रभाव और बिजली की निरन्तर बढ़ती मांग. अब एक नए अध्ययन के अनुसार, एआई के चुनिन्दा मॉडल की बनावट और इस्तेमाल में छोटे बदलावों के ज़रिए इनकी ऊर्जा खपत में विशाल कटौती की जा सकती है.