पिछले साल अक्टूबर से विदेशी निवेशकों की बिकवाली, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और टैरिफ वार ने भारतीय मार्केट को बुरी तरह तोड़ दिए। स्टॉक मार्केट की गिरावट के चलते निवेशकों का रुझान भी पलटा और एक्टिव क्लाइंट बेस में गिरावट आई जिसका 80 फीसदी झटका तो सिर्फ ब्रोकरेज फर्मों को लगा। वहीं कुछ इस आंधी में भी नए यूजर्स जोड़ने में सफल रहे