मकानों की पुताई के लिए पेंट, खाना पकाने के लिए बर्तन, खिलौने, सौंदर्य प्रसाधन, मसाले और ऐसी ही अन्य वस्तुओं में सीसा (lead) का इस्तेमाल और उसके सम्पर्क में आना, स्वास्थ्य के लिए एक ऐसा बड़ा ख़तरा है जिसकी भरपाई कर पाना कठिन साबित होता है. इसके मद्देनज़र, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विषाक्त सीसा की रोकथाम के लिए जल्द से जल्द क़दम उठाने का आग्रह किया है.
एक अनुमान के अनुसार, सीसा के सम्पर्क में आने से हर वर्ष 35 लाख मौतें होती हैं, और करोड़ों बच्चे प्रभावित होते हैं. यह उनके अंगों पर असर डाल सकता है और बीमारी की वजह बन सकता है.
सीसा धातु में न्यूरोटॉक्सिन होते हैं जिनके कारण बच्चों के मस्तिष्क को ऐसा नुक़सान होता है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती या जिसका इलाज सम्भव नहीं है.
नवजात शिशुओं और पाँच साल से कम उम्र के बच्चों के लिये यह विशेष रूप से घातक है, जिससे उनके मस्तिष्क में जीवन भर के लिये तन्त्रिका-तन्त्र, संज्ञानात्मक और शारीरिक विकलांगता जैसी बाधाएँ हो जाती हैं.
रक्त में सीसा धातु की मौजूदगी के लक्षण अक्सर नज़र नहीं आते हैं और यह ख़ामोशी से बच्चों के स्वास्थ और विकास को नुक़सान पहुँचाती है. सीसे के साथ सम्पर्क का कोई भी स्तर अभी सुरक्षित नहीं माना गया है और कम मात्रा से भी इतना नुक़सान हो सकता है कि उसे फिर ठीक न किया जा सके.
सीसे से स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से ही यूएन एजेंसी और साझीदार संगठन, सीसे के इस्तेमाल वाले पेंट पर पाबन्दी लगाने का अनुरोध कर रहे हैं. मगर, केवल आधी संख्या में देशों ने ही सीसायुक्त पेंट के इस्तेमाल पर रोक के लिए बाध्यकारी उपायों को अपनाया है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के सदस्य देशों ने, सीसे के विषैले प्रभावों को एक गम्भीर स्वास्थ्य चिन्ता माना है और WHO को इसके दुष्प्रभावों में कमी लाने के लिए एक वैश्विक योजना तैयार करने के लिए कहा है.
सीसा के ज़हरीले प्रभावों से बचाव पर केन्द्रित प्रयासों के तहत 18 से 24 अक्टूबर के दौरान ‘अन्तरराष्ट्रीय सीसाजनित-विषाक्तता रोकथाम सप्ताह’ का आयोजन किया गया है.
इसी सिलसिले में, WHO ने 2027 में एक तकनीकी पैकेज को पेश करने की बात कही है, जिसमें देशों के लिए व्यावहारिक सुझाव पेश किए जाएंगे, ताकि सीसा के साथ सम्पर्क के लिए ज़िम्मेदार मुख्य स्रोतों और उनके असरदार बचाव उपायों की पहचान की जा सके. रोकथाम योग्य बीमारियों और मौतों में कमी लाने के लिए यह अहम है.
पिछले वर्ष, WHO ने एक पहल के ज़रिए, रक्त में सीसे की मात्रा को मापने के लिए लैब परीक्षण क्षमता को मज़बूती देने की योजना पर काम शुरू किया, ताकि निगरानी के साथ सीसे के साथ सम्पर्क के स्रोतों का जल्द पता लगाया जा सके. यह पहल ब्राज़ील, भारत, नेपाल, इथियोपिया, घाना, मलावी, रवांडा, दक्षिण अफ़्रीका और तंज़ानिया में लागू की जा रही है.
इस वर्ष, अन्तरराष्ट्रीय रोकथाम सप्ताह की थीम है: पता लगाने से लेकर रोकथाम तक, जिसका उद्देश्य सीसा के विषैले प्रभावों की रोकथाम करना और उसके इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए जागरूकता का प्रसार है.
इसके लिए निम्न उपाय अहम माने गए हैं:
सीसे की रोकथाम करने से व्यापक सामाजिक व आर्थिक लाभ हासिल किए जा सकते हैं, जैसेकि स्वास्थ्य देखभाल की लागत में कमी, शिक्षा में बेहतर परिणाम और स्वस्थ समाज का निर्माण.
यूएन एजेंसी का मानना है कि ऐसे मामलों का पता लगाने की व्यवस्था से आगे बढ़कर अब रोकथाम की उन रणनीतियों को अपनाया जाना होगा, जिनसे इस समस्या की जड़ को ही दूर किया जा सके.