यमन में हूथी लड़ाकों और अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के सुरक्षा बलों के बीच हिंसक टकराव में, हाल के दिनों में तेज़ी आई है जिससे एक विशाल मानवीय संकट आकार ले रहा है. देश का तीसरा सबसे बड़ा शहर, ताइज़ सबसे अधिक प्रभावित है और हिंसा प्रभावित इलाक़ों में सहायता पहुँचाने में बाधाओं की वजह से आठ लाख लोग जीवनरक्षक सहायता से कट गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार, लड़ाई के अग्रिम मोर्चे बदल रहे हैं, सड़के अवरुद्ध हैं और असुरक्षा व्याप्त है और इन परिस्थितियों में ताइज़ व अन्य हिंसा प्रभावित इलाक़ों में ज़रूरतमन्दों तक राहत पहुँचाना कठिन हो गया है.
वर्ष 2014 से, ईरान द्वारा समर्थित हूथी लड़ाकों का सऊदी अरब समर्थित यमन सरकार से टकराव रहा है और ताइज़ इस लड़ाई का एक बड़ा केन्द्र बना हुआ है.
हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह गुट) ने 2015 से इस शहर की घेराबन्दी की हुई है. पिछले महीने, उन्होंने ताइज़ को यमनी सरकार के नियंत्रण वाले इलाक़े से जोड़ने वाली अन्तिम सड़क पर क़ब्जा कर लिया, जिसके बाद शहर की सख़्त नाकेबन्दी कर दी गई है.
सितम्बर में हूथी लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट पर अपना दबदबा बढ़ाते हुए कुछ इलाक़ों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था, जिसके बाद, सरकारी सुरक्षा बलों ने राजधानी सना और अन्य इलाक़ों को अपने नियंत्रण में लेने के लिए जवाबी अभियान छेड़ा है.
सऊदी अरब ने हवाई कार्रवाई के ज़रिए इसे अपना समर्थन दिया, मगर, इसके जवाब में हूथी लड़ाकों ने सऊदी अरब पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए हैं.
यमन संकट शुरू होने के बाद से ही, बड़ी संख्या में विस्थापित हुए लोगों ने ताइज़ में शरण ली हुई है. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, टकराव फिर भड़कने की वजह से खाद्य क़ीमतों में उछाल आया है, ज़रूरी सामान की क़िल्लत है.
पिछले एक दशक से अधिक समय से मानवीय संकट से जूझ रहे यमन में, 1.8 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. पाँच वर्ष से कम आयु के 22 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं जिनमें पाँच लाख बच्चों की स्थिति गम्भीर है और उनके जीवन के लिए ख़तरा है.
यूएन खाद्य एजेंसी ने कुछ इलाक़ों में परिस्थितियों के विश्लेषण के आधार पर बताया है कि लगभग 75 प्रतिशत घर-परिवार, अपनी बुनियादी खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हैं. हिंसक टकराव की वजह से यूएन एजेंसी के कामकाज और सहायता प्रयासों पर असर हुआ है, कार्यालय लड़ाई की चपेट में आए हैं, खाद्य भंडारों को नुक़सान पहुँचा है और सप्लाई चेन मार्ग में अवरोध आया है.
स्वास्थ्य सेवाओं पर भीषण दबाव है और लोग बिना सुरक्षित जल के भीड़भाड़ भरे आश्रय स्थलों में रहने के लिए मजबूर हैं. हैज़ा संक्रमण मामलों में वृद्धि देखी गई है और बच्चों पर ख़सरा का भी जोखिम है.
यमन में यूएन खाद्य एजेंसी के प्रतिनिधि अल ख़िदीर डालूम ने उन लोगों की संख्या बढ़ने पर चिन्ता जताई है, जिन तक मदद पहुँचाना कठिन होता जा रहा है. “बहुत से परिवार अनेक बार विस्थापित हुए हैं और बुनियादी खाद्य वस्तुओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं.”
ताइज़ और यमन के पश्चिमी तट पर समुदायों के साथ सम्पर्क कट जाने से, आठ लाख लोग अब सहायता प्रयासों के दायरे से बाहर हैं.
विश्व खाद्य कार्यक्रम ने उन 1.15 लाख लोगों के लिए आपात सहायता की व्यवस्था की है, जिन तक पहुँच पाना अभी सम्भव है.
विस्थापितों की बढ़ती संख्या और सहायता आवश्यकताओं में उछाल के बीच, यूएन एजेंसी ने 15 लाख लोगों तक राहत पहुँचाने के लिए तैयार होने की बात कही है, मगर इसके लिए सहायता मार्ग की उपलब्धता अहम है.
WFP के अनुसार, यमन में 2027 तक खाद्य सहायता, पोषण कार्यक्रम, स्कूली आहार और अन्य मानवीय सहायता गतिविधियों के लिए 26.8 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है.