राजस्थान के ग्रामीण इलाक़ों में पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताएँ, महिलाओं के स्वास्थ्य निर्णयों को नियंत्रित करती रही हैं, मगर वहाँ अब बदलाव की बयार बह रही है. इस परिवर्तन का श्रेय जाता है UNFPA की साझेदारी को, जिसके ज़रिए, गर्भनिरोधक विकल्पों को सुलभ, सुरक्षित और अधिकार-आधारित बनाया जा रहा है. सास-बहुओं की अगुवाई में अब महिलाएँ न केवल परम्पराओं को चुनौती दे रही हैं, बल्कि अपने और अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए साहसिक फ़ैसले भी ले रही हैं.