भारत के झारखंड प्रदेश की तन्नू कुमारी कभी मानती थीं कि लड़कियों पर लगाई गई पाबन्दियाँ सामान्य हैं. लेकिन एक चित्रकथा श्रृँखला ने उनकी सोच बदल दी. अब वह घर में असमान व्यवहार पर सवाल उठाती हैं, अपने गाँव में लड़कियों के अधिकारों पर बोलती हैं और अन्य लड़कियों को शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित करती हैं.