युद्धभूमि पर गोलाबारी बन्द हो जाने के लम्बे समय बाद तक भी हिंसक टकराव के दौरान यौन हिंसा अपराधों का ज़हर पीड़ितों और समुदायों को प्रभावित करता है. यौन हिंसा के पीड़ितों को कई पीढ़ियों तक इसके सदमे, कथित शर्मिंदगी व कलंक से जूझना पड़ता है. संयुक्त राष्ट्र ने 19 जून, गुरूवार को ‘हिंसक टकराव में यौन हिंसा के उन्मूलन के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर इन बर्बर कृत्यों के अन्तर-पीढ़िगत प्रभावों, उनकी पीड़ा को उजागर किया गया है.