असीम मुनीर के फील्ड मार्शल बनाए जाने की घोषणा के बाद अयूब खान को याद करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि इतिहास बताता है कि पाकिस्तान में फील्ड मार्शल के रिकॉर्ड कुछ अच्छे नहीं रहे हैं। ऐसे में ये जानना इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि पाकिस्तान में वजीरों से ज्यादा ताकत जनरलों के पास होती है। चलिए जानते हैं कि आखिर मुनीर का फील्ड मार्शल बनना पाकिस्ता के लिए क्यों है खतर की घंटी