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आज जहां युवा कैफे और मॉल में पार्ट-टाइम जॉब करते हैं, वहीं 17 साल की सुलांद्री कोत्ज़े ने एक अनोखा रास्ता चुना। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उसने कब्रिस्तान की पुरानी कब्रों की सफाई और देखभाल का काम शुरू किया। ये फैसला उसकी मेहनत और हिम्मत की मिसाल बन गया