भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल महत्वपूर्ण साबित होगी। यूएस फेड का सख्त रुख (hawkish stance) वैश्विक वित्तीय स्थितियों को तंग कर सकता है,उभरते बाजारों में आने वाले विदेशी पूंजी प्रवाह पर दबाव डाल सकता है और निफ्टी में शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है। इसके विपरीत,मुद्रास्फीति और विकास दर का अधिक संतुलित आकलन जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) को सपोर्ट कर सकता है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के करीब आने के साथ,बाजार नीतिगत अनिश्चितता और भू-राजनीतिक घटनाओं को लेकर भी चौकन्ने रहेंगे। इसलिए, निवेशकों को ब्याज दरों पर लिए जाने वाले फैसले के बजाय,इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए कि इससे आने वाले महीनों में ग्लोबल लेवल पर पूंजी की लागत और तरलता (liquidity) के बारे में क्या संकेत मिलता है।