दुनिया के अनेक स्थानों पर बढ़ते टकरावों, युद्धों, जलवायु संकट और घटते वित्तीय संसाधनों ने 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति की रफ़्तारको ख़तरनाक रूप से पटरी से उतार दिया है. 2030 की समय सीमा तक केवल चार साल बाक़ी बचे हैं मगर कोविड महामारी के दीर्घकालिक प्रभावों और भू-राजनैतिक तनावों के कारण प्रगति रुक गई है या पिछड़ गई है.