नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि दर घटने के बाद चिंता व्यक्त की और हिन्दुओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब किसी समाज की जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से कम हो जाती है तो वो समाज धरती से विलुप्त हो सकता है। मोहन भागवत की हिन्दुओं को दी गई इस सलाह पर मौलाना साजिद रशीदी का बयान आया है। मौलाना साजिद रशीदी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान को कोट करते हुए उनसे ये पूछा है कि आखिर वो इस बयान के पीछे आपकी मंशा क्या है?
मोहन भागवत के बयान को लेकर मौलवी साजिद रशीदी ने कहा, ‘संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आज बयान दिया है कि हिन्दुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। इस बात पर मुसलमान को कोई ऐतराज नहीं है कि आपके बच्चे तीन हों कि चार हों लेकिन इस बयान के पीछे आपकी मंशा क्या है? आपकी मंशा ये है कि आप मुसलमानों की बढ़ती हुई आबादी से हिन्दुओं को डराना चाहते हैं। आप ये बताना चाहते हैं ये जताना चाहते हैं कि मुसलमान जिस तरह से अपनी आबादी बढ़ा रहा है हिन्दुओं को भी अपनी आबादी बढ़ानी चाहिए। कितना बढ़ाना चाहते हो अपनी आबादी भाई?’
मोहन भागवत के बयान पर भड़के मौलाना रशीदी
मोहन भागवत के बयान पर मौलाना साजिद रशीदी ने भड़कते हुए कहा, ‘देश में 80 प्रतिशत हो इससे ज्यादा कितना बढ़ाओगे? हिन्दुस्तान की आबादी चीन से भी ज्यादा हो गई है। आप तीन बच्चों का फरमान जारी कर रहे हैं मुसलमानों से हिन्दुओं को डराओ नहीं ये हर आदमी के अपने विवेक पर छोड़ दो कि वो बच्चे तीन पैदा करता है या दो बच्चे पैदा करता है एक बच्चा पैदा करता है या नहीं करता है ये उसकी मर्जी है। आप कौन होते हैं इंस्ट्रक्शन देने वाले कि भई तीन होने चाहिए, चार होने चाहिए या फिर कतने होने चाहिए? इसीलिए इसके पीछे की मंशा शक के दायरे में है। ये मुसलमानों से हिन्दुओं को डराने की कोशिश है।’
क्या बोले थे संघ प्रमुख मोहन भागवत?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिन्दुओं की घटती आबादी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब हिन्दुओंको कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने साल 1998 और 2002 में तय की गई जनसंख्या नीति का हवाला देते हुए आगे कहा, ‘देश में किसी भी समुदाय की जनसंख्या 2.1 से नीचे नहीं जानी चाहिए। हमारे देश की जनसंख्या नीति 1998 या 2002 में तय की गई थी। किसी समाज की जनसंख्या 2.1 से कम नहीं होनी चाहिए। हमें दो या तीन से अधिक की बच्चों की जन्म दर की जरूरत होती है, जनसंख्या विज्ञान यही कहता है। आधुनिक जनसंख्या विज्ञान कहता है कि जब किसी समाज की जनसंख्या (प्रजनन दर) 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वो समाज धरती से लुप्त हो जाता है।वो समाज तब भी नष्ट हो जाता है, जब कोई संकट नहीं होता। इस तरह से कई भाषाएं और समाज नष्ट हो गए।’