उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को कहा कि इतिहास की पुस्तकों में स्वतंत्रता संग्राम के कुछ नायकों के साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि केवल चुनिंदा व्यक्तियों को श्रेय देने के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई।
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उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियों में देशभक्ति की भावना जागृत करने के लिए ‘‘बिना किसी लाग-लपेट के’’ ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है। उप राष्ट्रपति ने किसानों के साथ बातचीत के माध्यम से समस्याओं के समाधान के लिए काम करने की भी अपील की।
यहां राजा महेंद्र प्रताप के 138वीं जयंती समारोह को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा कि देश ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले लोगों को ‘‘चाटुकार बता कर अपने इतिहास को समृद्ध नहीं कर सकता…हम अपने नायकों का कद कम करके नहीं दिखा सकते।’’
उप राष्ट्रपति ने किसानों का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘हमें यह याद रखना होगा कि हम अपने ही लोगों से नहीं लड़ रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं हो रहा है तो भला किसी को नींद कैसे आ सकती है?’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टकराव की स्थिति में अड़ियल रुख अपनाना खराब कूटनीति है।
धनखड़ ने कहा, ‘‘इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है और आजादी दिलाने में केवल कुछ लोगों के योगदान को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि जैसे ये उनका एकाधिकार था। यह हमारे अंत:करण को कचोटता है और हमारी आत्मा और हृदय पर बोझ है।’’
उन्होंने कहा कि यह न्याय का उपहास है कि हम राजा महेंद्र प्रताप जैसे लोगों के वीरतापूर्ण कार्यों को मान्यता देने में ‘‘बुरी तरह विफल’’ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप हमारे देश की आजादी की बुनियाद को देखें तो हमें बहुत अलग तरीके से पढ़ाया गया है। हमारी (देश की) आजादी की बुनियाद राजा महेंद्र प्रताप सिंह और अन्य गुमनाम नायकों या कम चर्चित नायकों के सर्वोच्च बलिदान पर टिकी है।’’
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