भारत और ब्रिटेन के बदलते संबंधों को केवल व्यापार और कूटनीति के नजरिए से नहीं, बल्कि दोनों देशों के साझा औपनिवेशिक इतिहास और उसकी गहरी छाप को ध्यान में रखते हुए समझा जाना चाहिए। यही केंद्रीय विचार था ‘टर्म्स ऑफ ट्रेड: इंडिया, ब्रिटेन एंड द लॉन्ग शैडो ऑफ एम्पायर’ नामक सार्वजनिक संव