बच्चों की पढ़ाई में अच्छे नंबर और रैंक की चाह कई बार उनके लिए स्ट्रेस का कारण बन जाती है। कम उम्र से ही उनसे फर्स्ट आने और दूसरों से बेहतर करने की उम्मीद की जाने लगती है, जिससे उन्हें लग सकता है कि उनकी काबिलियत सिर्फ मार्क्स से पता नहीं चलती। हर बच्चा अलग होता है, इसलिए उसे अपनी गति से सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। बच्चों के अच्छे फ्यूचर के साथ उनकी खुशी, सेल्फ-कॉन्फिडेंस और पसंद का भी उतना ही ध्यान रखना जरूरी है।