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विश्वभर में ज़्यादातर लोग दो या उससे अधिक बच्चे चाहते हैं, लेकिन अनेक परिवार विभिन्न कारणों से अपनी इच्छानुसार संख्या में बच्चे पैदा नहीं कर पा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री के अनुसार, जनसांख्यिकीय संकट को लेकर बढ़ती चिन्ताएँ निराधार हैं.