हमारे पास कुछ बचा है तो वो है उम्मीद और स्वयं की शक्ति. ये कहना है ग़ाज़ा युद्ध के कारण मौत के दर्द और विस्थापन से त्रस्त महिलाओं का. ग़ाज़ा में जारी युद्ध का सबसे अधिक ख़ामियाज़ा महिलाओं व लड़कियों को भुगतना पड़ रहा है, जिनके लिए इन हालात में सुरक्षित स्थान सिकुड़ते जा रहे हैं. युद्ध की भयावहता के बीच अलग-अलग पीढ़ियों व अलग-अलग क्षेत्रों से विस्थापित महिलाओं की दर्दभरी दास्तान.